✦ ॥ नमो तस्स भगवतो अरहतो सम्मासम्बुद्धस्स ॥ ✦
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आनन्द के द्वारा

— इस श्रेणी से संबंधित संपूर्ण संकलन —

  • १०. सुभसुत्तं

    १०. सुभसुत्तं

    सुत्तपिटक / दीघनिकाय

    भगवान के परिनिर्वाण के पश्चात, आनन्द भन्ते को भगवान की शिक्षाओं को स्पष्ट करने के लिए बुलाया गया।

  • १८. जनवसभ सुत्त

    १८. जनवसभ सुत्त

    सुत्तपिटक / दीघनिकाय

    भगवान बुद्ध के एक पूर्वजन्म की प्रेरणादायी और रोमांचकारी कथा, जिसमें वे एक महान चक्रवर्ती सम्राट बने। सुदर्शन महाराज की महानता उनकी सहजता में घुल-मिलकर इस जातक कथा को अत्यंत रोचक और कभी न भूलनेवाली बनाती है।

  • ३२. महागोसिङ्ग सुत्त

    ३२. महागोसिङ्ग सुत्त

    सुत्तपिटक / मज्झिमनिकाय

    ‘किस तरह का भिक्षु शानदार गोसिङ्ग वन की शोभा होगा?’ प्रसिद्ध भिक्षुओं का अलग-अलग उत्तर।

  • ५२. अट्ठकनागर सुत्त

    ५२. अट्ठकनागर सुत्त

    सुत्तपिटक / मज्झिमनिकाय

    एक गृहस्थ भगवान के परिनिर्वाण के पश्चात अमृतद्वार ढूँढ रहा था। आनन्द भन्ते ने उसे एक नहीं, ग्यारह अमृतद्वार दिखाते हैं।

  • ५३. सेख सुत्त

    ५३. सेख सुत्त

    सुत्तपिटक / मज्झिमनिकाय

    जब भगवान को पीठ दर्द हुआ, तब भन्ते आनन्द ने उपदेश की जिम्मेदारी संभाली और शाक्यों को साधना मार्ग का वर्णन किया।

  • ७६. सन्दक सुत्त

    ७६. सन्दक सुत्त

    सुत्तपिटक / मज्झिमनिकाय

    आनन्द भन्ते परिव्राजक गुरु से चर्चा करते हैं, तो वह अपने सभी शिष्यों को भिक्षु बनने भेज देते हैं।

  • ८८. बाहितिक सुत्त

    ८८. बाहितिक सुत्त

    सुत्तपिटक / मज्झिमनिकाय

    राजा प्रसेनजित आयुष्मान आनंद से भगवान के कर्मों पर प्रश्न पूछता है, और प्रसन्न होकर अपना विदेशी वस्त्र दान करता है।