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आहार प्रतिकूल संज्ञा
लेखभगवान कहते हैं—आहार-प्रतिकूल नज़रिए की साधना करना, उसे विकसित करना — महाफ़लदायी, महालाभकारी होता है। वह अमृत में डुबोता है, अमृत में पहुँचाता है। कैसे साधक आहार-प्रतिकूल नज़रिए की साधना करता है?