✦ ॥ नमो तस्स भगवतो अरहतो सम्मासम्बुद्धस्स ॥ ✦
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खंडन

— इस श्रेणी से संबंधित संपूर्ण संकलन —

  • ८. महासीहनादसुत्तं

    ८. महासीहनादसुत्तं

    सुत्तपिटक / दीघनिकाय

    एक नंगे साधु को काया का कठोर तप करने में ही राग है। किन्तु भगवान उसे बताते हैं कि तब भी उसका मन दूषित रह सकता है।

  • ७८. समणमुण्डिक सुत्त

    ७८. समणमुण्डिक सुत्त

    सुत्तपिटक / मज्झिमनिकाय

    एक परिव्राजक भगवान के उपासक को “अजेय श्रमण” के चार गुण बताता है, पर भगवान उसका खंडन कर दस गुण बताते हैं।

  • ९०. कण्णकत्थल सुत्त

    ९०. कण्णकत्थल सुत्त

    सुत्तपिटक / मज्झिमनिकाय

    राजा प्रसेनजित, भगवान की ‘सर्वज्ञ-सर्वदर्शी’ बात की अफवाह सुनकर, सत्य जानने के लिए स्वयं भगवान के पास पहुँचता है।

  • १०१. देवदह सुत्त

    १०१. देवदह सुत्त

    सुत्तपिटक / मज्झिमनिकाय

    इस सूत्र में भगवान बुद्ध उन निगण्ठ (जैन) सिद्धांतों का खण्डन करते हैं, जिन्हें दुर्भाग्य से आज कई लोग बौद्ध मत समझ बैठे हैं।