गृहस्थ के लिए
— इस श्रेणी से संबंधित संपूर्ण संकलन —

६. महालिसुत्तं
सुत्तपिटक / दीघनिकायइसमें भगवान विभिन्न उपासकों को दिव्य-रूप देखने और दिव्य-आवाज सुनने के बारे में बताते हैं। किन्तु उसके परे की उत्कृष्ठ चीजों को साक्षात्कार करने का मार्ग भी बताते हैं।

११. केवट्टसुत्तं
सुत्तपिटक / दीघनिकायक्या भिक्षुओं के द्वारा चमत्कार दिखाना उचित है, ताकि लोगों में श्रद्धा बढ़ जाएँ? भगवान का इस पर अविस्मरणीय उत्तर।

१४. चूळदुक्खक्खन्ध सुत्त
सुत्तपिटक / मज्झिमनिकायभगवान अपने चचेरे भाई महानाम को कामुकता के बारे में बताते हैं। साथ ही, जैन साधकों से हुए वार्तालाप का उल्लेख भी करते हैं।

१६. महापरिनिब्बान सुत्त
सुत्तपिटक / दीघनिकाययह पालि साहित्य का सबसे लंबा सूत्र है, जो बुद्ध की परिनिर्वाण कथा को विवरण के साथ बताता है। भगवान बुद्ध के अंतिम दिनों के बारे में यहाँ लंबा ब्योरा मिलता है, जिससे बुद्ध के व्यक्तित्व की गहराई झलकती है।

१८. मधुपिण्डिक सुत्त
सुत्तपिटक / मज्झिमनिकायभगवान के मुख से निकला 'प्रपंच' पर एक अत्यंत सारगर्भित और संक्षिप्त धम्म। लेकिन उसका अर्थ कौन बताए?

३१. सिङ्गालसुत्त
सुत्तपिटक / दीघनिकायएक युवा पुरुष अपने मृत पिता के आदेशानुसार व्यर्थ कर्मकांड करता है। किन्तु, बुद्ध उसे उसका गहरा महत्व समझाते हुए गृहस्थों के व्रत और जिम्मेदारियों पर प्रकाश डालते है।

३२. आटानाटियसुत्त
सुत्तपिटक / दीघनिकायदुनिया में अनेक तरह के अदृश्य सत्व हैं, और हर कोई हमारा हितकांक्षी नहीं है। कई सत्व हिंसक भी हैं। यह सूत्र रक्षामंत्र के तौर पर उनसे बचने का मार्ग बताता है।

४१. सालेय्यक सुत्त
सुत्तपिटक / मज्झिमनिकायभगवान साल गाँव के लोगों को ‘सम’ और ‘विषम’ आचरण के माध्यम से सद्गति और दुर्गति के कारणों को स्पष्ट करते हैं।

४२. वेरञ्जक सुत्त
सुत्तपिटक / मज्झिमनिकायभगवान गाँव के लोगों को ‘सम’ और ‘विषम’ आचरण के माध्यम से सद्गति और दुर्गति के कारणों को स्पष्ट करते हैं।

४४. चूळवेदल्ल सुत्त
सुत्तपिटक / मज्झिमनिकाययहाँ उपासक के गहरे सवालों का उत्तर एक प्रसिद्ध भिक्षुणी देती हैं। और क्या ही लाजवाब उत्तर देती हैं!

५१. कन्दरक सुत्त
सुत्तपिटक / मज्झिमनिकाय'पशुओं का स्वभाव सीधा होता है, जबकि मानव स्वभाव का कोई भरोसा नहीं!' इस बात पर भगवान चार प्रकार के व्यक्तियों का वर्णन करते हैं।

५२. अट्ठकनागर सुत्त
सुत्तपिटक / मज्झिमनिकायएक गृहस्थ भगवान के परिनिर्वाण के पश्चात अमृतद्वार ढूँढ रहा था। आनन्द भन्ते ने उसे एक नहीं, ग्यारह अमृतद्वार दिखाते हैं।

५३. सेख सुत्त
सुत्तपिटक / मज्झिमनिकायजब भगवान को पीठ दर्द हुआ, तब भन्ते आनन्द ने उपदेश की जिम्मेदारी संभाली और शाक्यों को साधना मार्ग का वर्णन किया।

५४. पोतलिय सुत्त
सुत्तपिटक / मज्झिमनिकायएक गृहस्थ जब स्वयं को दुनियादारी से अलग समझता है, तब भगवान उसे सच्चे अर्थ में दुनियादारी से कटने का मार्ग बताते हैं।

५५. जीवक सुत्त
सुत्तपिटक / मज्झिमनिकायक्या बुद्ध अपने लिए मारे गए प्राणी का मांस खाते हैं? भगवान का स्पष्ट उत्तर!

५६. उपालि सुत्त
सुत्तपिटक / मज्झिमनिकायएक निगण्ठ उपासक वादविवाद के लिए भगवान के पास जाता है, और भगवान के जादू से दीवाना होकर लौटता है।

६०. अपण्णक सुत्त
सुत्तपिटक / मज्झिमनिकाययदि आपको किसी पर श्रद्धा न हो तो तर्क का आधार लेकर सुरक्षित दाँव लगाना चाहिए।

७८. समणमुण्डिक सुत्त
सुत्तपिटक / मज्झिमनिकायएक परिव्राजक भगवान के उपासक को “अजेय श्रमण” के चार गुण बताता है, पर भगवान उसका खंडन कर दस गुण बताते हैं।