✦ ॥ नमो तस्स भगवतो अरहतो सम्मासम्बुद्धस्स ॥ ✦
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जातक

— इस श्रेणी से संबंधित संपूर्ण संकलन —

  • ५. कूटदन्तसुत्तं

    ५. कूटदन्तसुत्तं

    सुत्तपिटक / दीघनिकाय

    महायज्ञ की अभिलाषा लिए सैकड़ों ब्राह्मणों संग आए कूटदंत को भगवान सबसे प्राचीन और सबसे फलदायी यज्ञ-पद्धति उजागर कर बताते हैं—एक ऐसा यज्ञ, जिसमें हिंसा त्यागकर जरूरतमंदों की सहायता की जाए।

  • १६. महापरिनिब्बान सुत्त

    १६. महापरिनिब्बान सुत्त

    सुत्तपिटक / दीघनिकाय

    यह पालि साहित्य का सबसे लंबा सूत्र है, जो बुद्ध की परिनिर्वाण कथा को विवरण के साथ बताता है। भगवान बुद्ध के अंतिम दिनों के बारे में यहाँ लंबा ब्योरा मिलता है, जिससे बुद्ध के व्यक्तित्व की गहराई झलकती है।

  • १७. महासुदस्सन सुत्त

    १७. महासुदस्सन सुत्त

    सुत्तपिटक / दीघनिकाय

    भगवान बुद्ध के एक पूर्वजन्म की प्रेरणादायी और रोमांचकारी कथा, जिसमें वे एक महान चक्रवर्ती सम्राट बने। सुदर्शन महाराज की महानता उनकी सहजता में घुल-मिलकर इस जातक कथा को अत्यंत रोचक और कभी न भूलनेवाली बनाती है।

  • १९. महागोविन्द सुत्त

    १९. महागोविन्द सुत्त

    सुत्तपिटक / दीघनिकाय

    भगवान बुद्ध की एक और प्रेरणादायी जातक कथा, जिसमें उन्होंने अपनी कार्यक्षमता से भूतकाल के भारत को आकार दिया। और, फिर धर्म की ओर मुड़कर सनातन ब्रह्म-धर्म ढूँढ निकाला, और उसे पैगंबर या ईश्वर के दूत की तरह संपूर्ण जम्बूद्वीप में फैलाया।

  • ५०. मारतज्जनीय सुत्त

    ५०. मारतज्जनीय सुत्त

    सुत्तपिटक / मज्झिमनिकाय

    मार महामोग्गल्लान भन्ते को परेशान करता है। तब वे उसे अपनी पूर्वजन्म कथा सुनाते हैं, जिसमें वे स्वयं मार थे।

  • ८१. घटिकार सुत्त

    ८१. घटिकार सुत्त

    सुत्तपिटक / मज्झिमनिकाय

    भगवान अपने पुराने मित्र घटिकार कुम्हार की प्रेरणादायी और भावनात्मक जातक कथा सुनाते हैं।

  • ८३. मघदेव सुत्त

    ८३. मघदेव सुत्त

    सुत्तपिटक / मज्झिमनिकाय

    भगवान की जातक कथा, जिसमें वे ऐसी कल्याणकारी प्रथा स्थापित करते हैं, जो इसके अनुसरणकर्ताओं को ब्रह्मलोक में सद्गति प्रदान करती है।