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जैन के लिए
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३६. महासच्चक सुत्त
सुत्तपिटक / मज्झिमनिकायप्रसिद्ध अहंकारी बहसबाज सच्चक, इस बार अकेले में भगवान से वाद-विवाद करता है।

५६. उपालि सुत्त
सुत्तपिटक / मज्झिमनिकायएक निगण्ठ उपासक वादविवाद के लिए भगवान के पास जाता है, और भगवान के जादू से दीवाना होकर लौटता है।

१०१. देवदह सुत्त
सुत्तपिटक / मज्झिमनिकायइस सूत्र में भगवान बुद्ध उन निगण्ठ (जैन) सिद्धांतों का खण्डन करते हैं, जिन्हें दुर्भाग्य से आज कई लोग बौद्ध मत समझ बैठे हैं।