✦ ॥ नमो तस्स भगवतो अरहतो सम्मासम्बुद्धस्स ॥ ✦
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जैन के लिए

— इस श्रेणी से संबंधित संपूर्ण संकलन —

  • ३६. महासच्चक सुत्त

    ३६. महासच्चक सुत्त

    सुत्तपिटक / मज्झिमनिकाय

    प्रसिद्ध अहंकारी बहसबाज सच्चक, इस बार अकेले में भगवान से वाद-विवाद करता है।

  • ५६. उपालि सुत्त

    ५६. उपालि सुत्त

    सुत्तपिटक / मज्झिमनिकाय

    एक निगण्ठ उपासक वादविवाद के लिए भगवान के पास जाता है, और भगवान के जादू से दीवाना होकर लौटता है।

  • १०१. देवदह सुत्त

    १०१. देवदह सुत्त

    सुत्तपिटक / मज्झिमनिकाय

    इस सूत्र में भगवान बुद्ध उन निगण्ठ (जैन) सिद्धांतों का खण्डन करते हैं, जिन्हें दुर्भाग्य से आज कई लोग बौद्ध मत समझ बैठे हैं।