✦ ॥ नमो तस्स भगवतो अरहतो सम्मासम्बुद्धस्स ॥ ✦
श्रेणी दर्शन

परधर्मी तपस्वी के लिए

— इस श्रेणी से संबंधित संपूर्ण संकलन —

  • ८. महासीहनादसुत्तं

    ८. महासीहनादसुत्तं

    सुत्तपिटक / दीघनिकाय

    एक नंगे साधु को काया का कठोर तप करने में ही राग है। किन्तु भगवान उसे बताते हैं कि तब भी उसका मन दूषित रह सकता है।

  • ५६. उपालि सुत्त

    ५६. उपालि सुत्त

    सुत्तपिटक / मज्झिमनिकाय

    एक निगण्ठ उपासक वादविवाद के लिए भगवान के पास जाता है, और भगवान के जादू से दीवाना होकर लौटता है।

  • ५७. कुक्कुरवतिक सुत्त

    ५७. कुक्कुरवतिक सुत्त

    सुत्तपिटक / मज्झिमनिकाय

    प्राचीन भारत के अनोखे संन्यासी, जो कुत्ते और गाय का व्रत रखते हैं, भगवान से उसका फल पूछते हैं।

  • १०१. देवदह सुत्त

    १०१. देवदह सुत्त

    सुत्तपिटक / मज्झिमनिकाय

    इस सूत्र में भगवान बुद्ध उन निगण्ठ (जैन) सिद्धांतों का खण्डन करते हैं, जिन्हें दुर्भाग्य से आज कई लोग बौद्ध मत समझ बैठे हैं।