श्रेणी दर्शन
परधर्मी तपस्वी के लिए
— इस श्रेणी से संबंधित संपूर्ण संकलन —

८. महासीहनादसुत्तं
सुत्तपिटक / दीघनिकायएक नंगे साधु को काया का कठोर तप करने में ही राग है। किन्तु भगवान उसे बताते हैं कि तब भी उसका मन दूषित रह सकता है।

५६. उपालि सुत्त
सुत्तपिटक / मज्झिमनिकायएक निगण्ठ उपासक वादविवाद के लिए भगवान के पास जाता है, और भगवान के जादू से दीवाना होकर लौटता है।

५७. कुक्कुरवतिक सुत्त
सुत्तपिटक / मज्झिमनिकायप्राचीन भारत के अनोखे संन्यासी, जो कुत्ते और गाय का व्रत रखते हैं, भगवान से उसका फल पूछते हैं।

१०१. देवदह सुत्त
सुत्तपिटक / मज्झिमनिकायइस सूत्र में भगवान बुद्ध उन निगण्ठ (जैन) सिद्धांतों का खण्डन करते हैं, जिन्हें दुर्भाग्य से आज कई लोग बौद्ध मत समझ बैठे हैं।