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परिव्राजक के द्वारा
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२७. चूळहत्थिपदोपम सुत्त
सुत्तपिटक / मज्झिमनिकायक्या हमें श्रद्धा से तुरंत मान लेना चाहिए? भगवान यहाँ उपमा देकर हमें सावधानी बरतने की सलाह देते हैं।

७८. समणमुण्डिक सुत्त
सुत्तपिटक / मज्झिमनिकायएक परिव्राजक भगवान के उपासक को “अजेय श्रमण” के चार गुण बताता है, पर भगवान उसका खंडन कर दस गुण बताते हैं।