ब्राह्मण के लिए
— इस श्रेणी से संबंधित संपूर्ण संकलन —

३. अम्बट्ठसुत्तं
सुत्तपिटक / दीघनिकायइस तीखी बहस में भगवान घमंडी ब्राह्मण युवक की जाति पुछकर उसकी स्वघोषित श्रेष्ठता को सीधी चुनौती देते है, और अहंकार चूर कर देते है।

४. भयभेरव सुत्त
सुत्तपिटक / मज्झिमनिकायबोधिसत्व ने जंगल में अकेले रहकर डर और आतंक का सामना करते हुए संबोधि कैसे पायी?

४. सोणदण्डसुत्तं
सुत्तपिटक / दीघनिकायक्या जाति से कोई ब्राह्मण होता है या कर्म से? भरी ब्राह्मणी सभा में हुई इस ज्वलंत संवाद में भगवान ब्राह्मणों को ‘ब्राह्मणत्व’ की परिभाषा समझाकर हलचल मचा देते है।

५. कूटदन्तसुत्तं
सुत्तपिटक / दीघनिकायमहायज्ञ की अभिलाषा लिए सैकड़ों ब्राह्मणों संग आए कूटदंत को भगवान सबसे प्राचीन और सबसे फलदायी यज्ञ-पद्धति उजागर कर बताते हैं—एक ऐसा यज्ञ, जिसमें हिंसा त्यागकर जरूरतमंदों की सहायता की जाए।

७. वत्थ सुत्त
सुत्तपिटक / मज्झिमनिकायमैले चित्त को धोना किसी मैले वस्त्र को धोने के समान ही है। बस जान लें कि 'मैल' क्या हैं।

१०. सुभसुत्तं
सुत्तपिटक / दीघनिकायभगवान के परिनिर्वाण के पश्चात, आनन्द भन्ते को भगवान की शिक्षाओं को स्पष्ट करने के लिए बुलाया गया।

१२. लोहिच्चसुत्तं
सुत्तपिटक / दीघनिकायक्या किसी की अध्यात्मिक सहायता नहीं करनी चाहिए? एक ब्राह्मण की दृष्टि का भगवान निवारण करते हैं।

१३. तेविज्जसुत्तं
सुत्तपिटक / दीघनिकायकुछ सच्चे त्रिवेदी ब्राह्मण युवक ब्रह्मा के साथ समागम करने के मार्ग पर उलझन में हैं। किन्तु वे भाग्यशाली हैं, क्योंकि भगवान पास ही रहते हैं।

२७. चूळहत्थिपदोपम सुत्त
सुत्तपिटक / मज्झिमनिकायक्या हमें श्रद्धा से तुरंत मान लेना चाहिए? भगवान यहाँ उपमा देकर हमें सावधानी बरतने की सलाह देते हैं।

३०. चूळसारोपम सुत्त
सुत्तपिटक / मज्झिमनिकाययह पिछले सूत्र की तरह ही ब्रह्मचर्य का सार बताता है, लेकिन अंतिम भाग में मिलावट नजर आती है।

९१. ब्रह्मायु सुत्त
सुत्तपिटक / मज्झिमनिकाय१२० वर्ष का वृद्ध ब्राह्मण अपने शिष्य को भगवान के लक्षण देखने भेजता है, और गहन रिपोर्ट पाकर परम-समर्पण करता है।

९२. सेल सुत्त
सुत्तपिटक / मज्झिमनिकायएक जटाधारी, जो ब्राह्मण गुरु के प्रति समर्पित है, उसके यहाँ भोजन निमंत्रण पर भगवान उसी गुरु और उसके शिष्यों को भिक्षु बनाकर वहाँ जाते हैं।

९३. अस्सलायन सुत्त
सुत्तपिटक / मज्झिमनिकायब्राह्मणों के प्रोत्साहन पर एक प्रतिभाशाली युवा ब्राह्मण जातिवाद पर भगवान से उलझने की भूल करता है।

९४. घोटमुख सुत्त
सुत्तपिटक / मज्झिमनिकायटहलते हुए आया एक अनजान ब्राह्मण भिक्षु से कह उठता है, “प्रव्रज्या अधार्मिक है!” तब भन्ते उसे धम्म बताते हैं।

९५. चङ्की सुत्त
सुत्तपिटक / मज्झिमनिकायजम्बुद्वीप के प्रमुख ब्राह्मणों में गिने जाने वाले चङ्की के समक्ष भगवान ब्राह्मणों के सभी दावों को एक-एक कर ध्वस्त करते हैं।

९६. एसुकारी सुत्त
सुत्तपिटक / मज्झिमनिकायएक ब्राह्मण भगवान से ब्राह्मण-व्यवस्था पर राय माँगता है, और भगवान खुलकर जवाब देते हैं।

९७. धनञ्जानि सुत्त
सुत्तपिटक / मज्झिमनिकायसारिपुत्त भन्ते एक मदहोश ब्राह्मण को पापकर्म से धम्म में लाते हैं और मृत्यु-क्षण में उसकी सद्गति सुनिश्चित करते हैं।

९८. वासेट्ठ सुत्त
सुत्तपिटक / मज्झिमनिकायब्राह्मण जन्म से होता है या कर्म से?—इस प्रश्न पर उलझे दो युवा ब्राह्मण अपना मतभेद सुलझाने के लिए भगवान के पास पहुँचते हैं।

९९. सुभ सुत्त
सुत्तपिटक / मज्झिमनिकायएक विख्यात ब्राह्मण-पुत्र भगवान से मिलने आता है, और गाली-गलौच तक करने के बाद अंततः शरण ग्रहण करता है।

१००. सङ्गारव सुत्त
सुत्तपिटक / मज्झिमनिकायएक ब्राह्मण स्त्री के भगवान को याद करते ही चिढ़ा युवा ब्राह्मण, भगवान से मिलकर स्वयं उपासक बन जाता है।