✦ ॥ नमो तस्स भगवतो अरहतो सम्मासम्बुद्धस्स ॥ ✦
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राजा के लिए

— इस श्रेणी से संबंधित संपूर्ण संकलन —

  • २. सामञ्ञफलसुत्तं

    २. सामञ्ञफलसुत्तं

    सुत्तपिटक / दीघनिकाय

    इस सूत्र में भगवान उजागर करते हैं कि धर्म वास्तव में क्या है। पुर्णिमा की रोमहर्षक रात में राजा अजातशत्रु भगवान के पास पहुँचकर मन की शान्ति पाता है।

  • २३. पायासि सुत्त

    २३. पायासि सुत्त

    सुत्तपिटक / दीघनिकाय

    राजा पायासि जिद्दी, भौतिकवादी और नास्तिक था। उसने ‘मरणोपरांत परलोक-वरलोक नहीं होता’ यह साबित करने के लिए बहुत अजीब प्रयोग किए थे। अंततः वह आकर अरहंत भिक्षु कुमार कश्यप से एक मनोरंजन-पूर्ण और यादगार बहस करता है।

  • ५८. अभयराजकुमार सुत्त

    ५८. अभयराजकुमार सुत्त

    सुत्तपिटक / मज्झिमनिकाय

    अभय राजकुमार को भगवान को दुविधा में डालकर उनका खण्डन करने भेजा जाता है।

  • ८२. रट्ठपाल सुत्त

    ८२. रट्ठपाल सुत्त

    सुत्तपिटक / मज्झिमनिकाय

    एक नवयुवक, प्रव्रज्या की अनुमति पाने के लिए माता-पिता से संघर्ष करता है, और अरहंत बनकर लौटकर धूम मचाता है।

  • ८४. मधुर सुत्त

    ८४. मधुर सुत्त

    सुत्तपिटक / मज्झिमनिकाय

    मथुरा का राजा ब्राह्मणों की स्व-घोषित श्रेष्ठता पर भन्ते की राय पूछते हैं, और भन्ते बेझिझक उत्तर देते हैं।

  • ८५. बोधिराजकुमार सुत्त

    ८५. बोधिराजकुमार सुत्त

    सुत्तपिटक / मज्झिमनिकाय

    राजकुमार मानता है कि परमसुख कठिन तप से मिलता है, सुखद मार्ग से नहीं! इसी पर भगवान का उत्तर।

  • ८७. पियजातिक सुत्त

    ८७. पियजातिक सुत्त

    सुत्तपिटक / मज्झिमनिकाय

    प्रियजनों से आखिर क्या मिलता है? भगवान के शब्द सहज बुद्धि के विपरीत जाते हैं, और समाज में हंगामा मचाते हैं।

  • ८८. बाहितिक सुत्त

    ८८. बाहितिक सुत्त

    सुत्तपिटक / मज्झिमनिकाय

    राजा प्रसेनजित आयुष्मान आनंद से भगवान के कर्मों पर प्रश्न पूछता है, और प्रसन्न होकर अपना विदेशी वस्त्र दान करता है।

  • ९०. कण्णकत्थल सुत्त

    ९०. कण्णकत्थल सुत्त

    सुत्तपिटक / मज्झिमनिकाय

    राजा प्रसेनजित, भगवान की ‘सर्वज्ञ-सर्वदर्शी’ बात की अफवाह सुनकर, सत्य जानने के लिए स्वयं भगवान के पास पहुँचता है।