✦ ॥ नमो तस्स भगवतो अरहतो सम्मासम्बुद्धस्स ॥ ✦
श्रेणी दर्शन

वाद-विवाद

— इस श्रेणी से संबंधित संपूर्ण संकलन —

  • ३. अम्बट्ठसुत्तं

    ३. अम्बट्ठसुत्तं

    सुत्तपिटक / दीघनिकाय

    इस तीखी बहस में भगवान घमंडी ब्राह्मण युवक की जाति पुछकर उसकी स्वघोषित श्रेष्ठता को सीधी चुनौती देते है, और अहंकार चूर कर देते है।

  • २३. पायासि सुत्त

    २३. पायासि सुत्त

    सुत्तपिटक / दीघनिकाय

    राजा पायासि जिद्दी, भौतिकवादी और नास्तिक था। उसने ‘मरणोपरांत परलोक-वरलोक नहीं होता’ यह साबित करने के लिए बहुत अजीब प्रयोग किए थे। अंततः वह आकर अरहंत भिक्षु कुमार कश्यप से एक मनोरंजन-पूर्ण और यादगार बहस करता है।

  • २४. पाथिक सुत्त

    २४. पाथिक सुत्त

    सुत्तपिटक / दीघनिकाय

    सुनक्खत भिक्षु को तमाशेबाज निर्वस्त्र तपस्वियों से आकर्षण है। किन्तु, तप का ऐसा तमाशा न भगवान करते हैं, न ही उनका भिक्षुसंघ। उसके भिक्षुत्व छोड़ने की बात पर, भगवान उसकी अक्ल ठिकाने लगाने की नाकाम कोशिश करते हैं।

  • २५. उदुम्बरिक सुत्त

    २५. उदुम्बरिक सुत्त

    सुत्तपिटक / दीघनिकाय

    यह सूत्र विभिन्न धर्मों के बीच होने वाले संवाद का एक बेहतरीन उदाहरण है। बुद्ध का आशय किसी को ‘बौद्ध’ बनाना नहीं, बल्कि उन्हें दुःखों से मुक्त करना है।

  • ३५. चूळसच्चक सुत्त

    ३५. चूळसच्चक सुत्त

    सुत्तपिटक / मज्झिमनिकाय

    एक प्रसिद्ध अहंकारी बहसबाज सच्चक, भगवान से सरेआम वाद-विवाद में भिड़ता है।

  • ३६. महासच्चक सुत्त

    ३६. महासच्चक सुत्त

    सुत्तपिटक / मज्झिमनिकाय

    प्रसिद्ध अहंकारी बहसबाज सच्चक, इस बार अकेले में भगवान से वाद-विवाद करता है।

  • ५६. उपालि सुत्त

    ५६. उपालि सुत्त

    सुत्तपिटक / मज्झिमनिकाय

    एक निगण्ठ उपासक वादविवाद के लिए भगवान के पास जाता है, और भगवान के जादू से दीवाना होकर लौटता है।

  • ५८. अभयराजकुमार सुत्त

    ५८. अभयराजकुमार सुत्त

    सुत्तपिटक / मज्झिमनिकाय

    अभय राजकुमार को भगवान को दुविधा में डालकर उनका खण्डन करने भेजा जाता है।

  • ८४. मधुर सुत्त

    ८४. मधुर सुत्त

    सुत्तपिटक / मज्झिमनिकाय

    मथुरा का राजा ब्राह्मणों की स्व-घोषित श्रेष्ठता पर भन्ते की राय पूछते हैं, और भन्ते बेझिझक उत्तर देते हैं।

  • ९३. अस्सलायन सुत्त

    ९३. अस्सलायन सुत्त

    सुत्तपिटक / मज्झिमनिकाय

    ब्राह्मणों के प्रोत्साहन पर एक प्रतिभाशाली युवा ब्राह्मण जातिवाद पर भगवान से उलझने की भूल करता है।

  • ९५. चङ्की सुत्त

    ९५. चङ्की सुत्त

    सुत्तपिटक / मज्झिमनिकाय

    जम्बुद्वीप के प्रमुख ब्राह्मणों में गिने जाने वाले चङ्की के समक्ष भगवान ब्राह्मणों के सभी दावों को एक-एक कर ध्वस्त करते हैं।

  • ९६. एसुकारी सुत्त

    ९६. एसुकारी सुत्त

    सुत्तपिटक / मज्झिमनिकाय

    एक ब्राह्मण भगवान से ब्राह्मण-व्यवस्था पर राय माँगता है, और भगवान खुलकर जवाब देते हैं।

  • ९८. वासेट्ठ सुत्त

    ९८. वासेट्ठ सुत्त

    सुत्तपिटक / मज्झिमनिकाय

    ब्राह्मण जन्म से होता है या कर्म से?—इस प्रश्न पर उलझे दो युवा ब्राह्मण अपना मतभेद सुलझाने के लिए भगवान के पास पहुँचते हैं।

  • ९९. सुभ सुत्त

    ९९. सुभ सुत्त

    सुत्तपिटक / मज्झिमनिकाय

    एक विख्यात ब्राह्मण-पुत्र भगवान से मिलने आता है, और गाली-गलौच तक करने के बाद अंततः शरण ग्रहण करता है।

  • १०१. देवदह सुत्त

    १०१. देवदह सुत्त

    सुत्तपिटक / मज्झिमनिकाय

    इस सूत्र में भगवान बुद्ध उन निगण्ठ (जैन) सिद्धांतों का खण्डन करते हैं, जिन्हें दुर्भाग्य से आज कई लोग बौद्ध मत समझ बैठे हैं।