संवेगजन्य उपदेश
— इस श्रेणी से संबंधित संपूर्ण संकलन —

३. धम्मदायाद सुत्त
सुत्तपिटक / मज्झिमनिकायभगवान बुद्ध के सच्चे वारिस कौन हैं? भगवान के द्वारा बताने पर सारिपुत्त भन्ते भी उसे और उजागर करते हैं।

६. आकङ्खेय्य सुत्त
सुत्तपिटक / मज्झिमनिकायभिक्षु की आकांक्षा लौकिक हो या अलौकिक, भगवान उन्हें पूरा करने का मार्ग बताते हैं।

८. सल्लेख सुत्त
सुत्तपिटक / मज्झिमनिकायभगवान बताते हैं कि साधक को, सुख और शान्ति में रमने के बजाय, अपने क्लेशों को ‘घिस-घिसकर मिटाने’ की तपश्चर्या करनी चाहिए।

१६. चेतोखिल सुत्त
सुत्तपिटक / मज्झिमनिकाययहाँ भगवान चित्त की बंजरता और उसके जंजीरों के बारे में अवगत कराते हैं।

१७. वनपत्थ सुत्त
सुत्तपिटक / मज्झिमनिकाययहाँ भगवान एक अत्यंत व्यावहारिक बात बताते हैं—भिक्षुओं को कहाँ रहना चाहिए, और कहाँ नहीं।

२१. ककचूपम सुत्त
सुत्तपिटक / मज्झिमनिकायआलोचना कैसे झेलें? भगवान जीवंत और यादगार उपमाओं के साथ बताते हैं।

२२. अलगद्दूपम सुत
सुत्तपिटक / मज्झिमनिकायएक भिक्षु अपनी पापी धारणा बनाता है। तब भगवान प्रसिद्ध उपमाओं के साथ अत्यंत गहरा धम्म बताया हैं।

२५. निवाप सुत्त
सुत्तपिटक / मज्झिमनिकायमार के चारे से कौन-से साधक बच सकते हैं? हिरणों की उपमा से भगवान समझाते हैं।

२६. पासरासि/अरियपरियेसना सुत्त
सुत्तपिटक / मज्झिमनिकायदुनिया के सभी लोग, दरअसल, दो तरह की खोज में जुटे हैं। भगवान विस्तार से स्वयं की खोज भी बताते हैं।

२७. चूळहत्थिपदोपम सुत्त
सुत्तपिटक / मज्झिमनिकायक्या हमें श्रद्धा से तुरंत मान लेना चाहिए? भगवान यहाँ उपमा देकर हमें सावधानी बरतने की सलाह देते हैं।

२८. महाहत्थिपदोपम सुत्त
सुत्तपिटक / मज्झिमनिकायसारिपुत्त भन्ते धम्म के तमाम प्रमुख सिद्धान्तों को चार आर्य सत्यों में पिरो देते हैं।

२९. महासारोपम सुत्त
सुत्तपिटक / मज्झिमनिकायभगवान ब्रह्मचर्य का सार बताते हैं, साथ ही उसके बाहरी छिलकों को भी उजागर करते हैं।

३३. महागोपालक सुत्त
सुत्तपिटक / मज्झिमनिकाययहाँ भगवान एक चरवाहे के गुणों की उपमा देकर भिक्षुओं को सारगर्भित धम्म बताते हैं।

३४. चूळगोपालक सुत्त
सुत्तपिटक / मज्झिमनिकाययहाँ भगवान एक यादगार उपमा के साथ हमें पार आने के लिए पुकारते हैं।

३७. चूळतण्हासङ्खय सुत्त
सुत्तपिटक / मज्झिमनिकायभगवान से धम्म सुनने पर भी देवराज इन्द्र मदहोश रहता है। तब महामोग्गल्लान भन्ते उसके रोंगटे खड़े कर उसे होश दिलाते हैं।

३९. महाअस्सपुर सुत्त
सुत्तपिटक / मज्झिमनिकायभगवान श्रमण को श्रमण बनाने वाले धम्म, और ब्राह्मण को ब्राह्मण बनाने वाले धम्म को उजागर करते हैं।

४०. चूळअस्सपुर सुत्त
सुत्तपिटक / मज्झिमनिकायश्रमण्यता के अनेक अनुचित व्रत और मार्ग हैं। भगवान उनकी निरर्थकता का खुलासा कर उचित मार्ग दिखाते हैं।

४१. सालेय्यक सुत्त
सुत्तपिटक / मज्झिमनिकायभगवान साल गाँव के लोगों को ‘सम’ और ‘विषम’ आचरण के माध्यम से सद्गति और दुर्गति के कारणों को स्पष्ट करते हैं।

४२. वेरञ्जक सुत्त
सुत्तपिटक / मज्झिमनिकायभगवान गाँव के लोगों को ‘सम’ और ‘विषम’ आचरण के माध्यम से सद्गति और दुर्गति के कारणों को स्पष्ट करते हैं।

४५. चूळधम्मसमादान सुत्त
सुत्तपिटक / मज्झिमनिकायभगवान चार प्रकार के धम्ममार्ग बताते हैं, जिनसे वर्तमान का अनुभव और भविष्य के फल भिन्न होते हैं।

४८. कोसम्बिय सुत्त
सुत्तपिटक / मज्झिमनिकायकौशाम्बी के झगड़ालू भिक्षुओं को भगवान स्नेहभाव और एकता का महत्व समझाते हैं।

६६. लटुकिकोपम सुत्त
सुत्तपिटक / मज्झिमनिकायभगवान का उपकार अनुभव करने वाले भिक्षु को भगवान बंधन तोड़ने और उपाधियों से परे जाने का धम्म सिखाते हैं।

६८. नळकपान सुत्त
सुत्तपिटक / मज्झिमनिकायभगवान प्रसिद्ध नवभिक्षुओं को उनके आध्यात्मिक कर्तव्यों की स्पष्टता देते हुए अपनी घोषणाओं का कारण बताते हैं।

८१. घटिकार सुत्त
सुत्तपिटक / मज्झिमनिकायभगवान अपने पुराने मित्र घटिकार कुम्हार की प्रेरणादायी और भावनात्मक जातक कथा सुनाते हैं।

८२. रट्ठपाल सुत्त
सुत्तपिटक / मज्झिमनिकायएक नवयुवक, प्रव्रज्या की अनुमति पाने के लिए माता-पिता से संघर्ष करता है, और अरहंत बनकर लौटकर धूम मचाता है।

८७. पियजातिक सुत्त
सुत्तपिटक / मज्झिमनिकायप्रियजनों से आखिर क्या मिलता है? भगवान के शब्द सहज बुद्धि के विपरीत जाते हैं, और समाज में हंगामा मचाते हैं।

९७. धनञ्जानि सुत्त
सुत्तपिटक / मज्झिमनिकायसारिपुत्त भन्ते एक मदहोश ब्राह्मण को पापकर्म से धम्म में लाते हैं और मृत्यु-क्षण में उसकी सद्गति सुनिश्चित करते हैं।