✦ ॥ नमो तस्स भगवतो अरहतो सम्मासम्बुद्धस्स ॥ ✦
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सारिपुत्त के द्वारा

— इस श्रेणी से संबंधित संपूर्ण संकलन —

  • ३. धम्मदायाद सुत्त

    ३. धम्मदायाद सुत्त

    सुत्तपिटक / मज्झिमनिकाय

    भगवान बुद्ध के सच्चे वारिस कौन हैं? भगवान के द्वारा बताने पर सारिपुत्त भन्ते भी उसे और उजागर करते हैं।

  • ५. अनङ्गण सुत्त

    ५. अनङ्गण सुत्त

    सुत्तपिटक / मज्झिमनिकाय

    सारिपुत्त भन्ते यादगार उपमाओं के साथ चित्त के दाग-धब्बों का रहस्य खोलते हैं।

  • ९. सम्मादिट्ठि सुत्त

    ९. सम्मादिट्ठि सुत्त

    सुत्तपिटक / मज्झिमनिकाय

    सारिपुत्त भन्ते सम्यक-दृष्टि को अनोखे अंदाज में, गहरे प्रतीत्य समुत्पाद के आधार पर परिभाषित करते हैं।

  • १६. महापरिनिब्बान सुत्त

    १६. महापरिनिब्बान सुत्त

    सुत्तपिटक / दीघनिकाय

    यह पालि साहित्य का सबसे लंबा सूत्र है, जो बुद्ध की परिनिर्वाण कथा को विवरण के साथ बताता है। भगवान बुद्ध के अंतिम दिनों के बारे में यहाँ लंबा ब्योरा मिलता है, जिससे बुद्ध के व्यक्तित्व की गहराई झलकती है।

  • २८. महाहत्थिपदोपम सुत्त

    २८. महाहत्थिपदोपम सुत्त

    सुत्तपिटक / मज्झिमनिकाय

    सारिपुत्त भन्ते धम्म के तमाम प्रमुख सिद्धान्तों को चार आर्य सत्यों में पिरो देते हैं।

  • २८. सम्पसादनीयसुत्त

    २८. सम्पसादनीयसुत्त

    सुत्तपिटक / दीघनिकाय

    परिनिर्वाण लेने से पूर्व, आयुष्मान सारिपुत्त आकर भगवान से मुलाक़ात करते है, और महान शास्ता के लिए भाव-विभोर बातें कहते हैं।

  • ३२. महागोसिङ्ग सुत्त

    ३२. महागोसिङ्ग सुत्त

    सुत्तपिटक / मज्झिमनिकाय

    ‘किस तरह का भिक्षु शानदार गोसिङ्ग वन की शोभा होगा?’ प्रसिद्ध भिक्षुओं का अलग-अलग उत्तर।

  • ३३. सङ्गीति सुत्त

    ३३. सङ्गीति सुत्त

    सुत्तपिटक / दीघनिकाय

    भगवान ने भिक्षुओं को महत्वपूर्ण सूत्रों का संगायन करने के लिए प्रेरित किया था। उसके उत्तर में सारिपुत्त भन्ते ने महत्वपूर्ण बौद्ध शिक्षाओं का अनुक्रम से संगायन किया।

  • ३४. दसुत्तर सुत्त

    ३४. दसुत्तर सुत्त

    सुत्तपिटक / दीघनिकाय

    यह सूत्र अपनी सूचियों को घटक संख्या के अनुसार एक से दस तक सूचीबद्ध करता है, मानो एक छोटा-सा अंगुत्तरनिकाय ही हो।

  • ४३. महावेदल्ल सुत्त

    ४३. महावेदल्ल सुत्त

    सुत्तपिटक / मज्झिमनिकाय

    यहाँ दो भिक्षुओं के सवाल-जवाब से धम्म के गहरे पहलू एक खिलते हुए फूल की तरह खुलते हैं।

  • ६९. गोलियानि सुत्त

    ६९. गोलियानि सुत्त

    सुत्तपिटक / मज्झिमनिकाय

    जब एक असभ्य अरण्यवासी भिक्षु संघ में आया, तो सारिपुत्त भन्ते ने आचार और साधना का वास्तविक अर्थ समझाया।

  • ९७. धनञ्जानि सुत्त

    ९७. धनञ्जानि सुत्त

    सुत्तपिटक / मज्झिमनिकाय

    सारिपुत्त भन्ते एक मदहोश ब्राह्मण को पापकर्म से धम्म में लाते हैं और मृत्यु-क्षण में उसकी सद्गति सुनिश्चित करते हैं।