हास्य
— इस श्रेणी से संबंधित संपूर्ण संकलन —

११. केवट्टसुत्तं
सुत्तपिटक / दीघनिकायक्या भिक्षुओं के द्वारा चमत्कार दिखाना उचित है, ताकि लोगों में श्रद्धा बढ़ जाएँ? भगवान का इस पर अविस्मरणीय उत्तर।

२१. ककचूपम सुत्त
सुत्तपिटक / मज्झिमनिकायआलोचना कैसे झेलें? भगवान जीवंत और यादगार उपमाओं के साथ बताते हैं।

२१. सक्कपञ्ह सुत्त
सुत्तपिटक / दीघनिकायदेवताओं का राजा होने के कारण, इन्द्र सक्क, सद्धर्म सुनने से वंचित रहता था। जब भी वह ऋषियों ने धर्म पुछने जाता, ऋषि ही उनसे पुछने लगते। अंततः उसने भगवान से भेंट की और धर्म के उत्तर सुनकर श्रोतापन्न बना।

२४. पाथिक सुत्त
सुत्तपिटक / दीघनिकायसुनक्खत भिक्षु को तमाशेबाज निर्वस्त्र तपस्वियों से आकर्षण है। किन्तु, तप का ऐसा तमाशा न भगवान करते हैं, न ही उनका भिक्षुसंघ। उसके भिक्षुत्व छोड़ने की बात पर, भगवान उसकी अक्ल ठिकाने लगाने की नाकाम कोशिश करते हैं।

३५. चूळसच्चक सुत्त
सुत्तपिटक / मज्झिमनिकायएक प्रसिद्ध अहंकारी बहसबाज सच्चक, भगवान से सरेआम वाद-विवाद में भिड़ता है।

७९. चूळसकुलुदायि सुत्त
सुत्तपिटक / मज्झिमनिकायइस रोचक और मजेदार चर्चा से परिव्राजकों का गुरु भिक्षु बनने का मन बनाता है, लेकिन उसके शिष्य उसे रोक देते हैं।

गड्ढा अरहंत
हास्यएक बार श्रीलंका के एक वनवासी भंते, अपनी बांस की कुटी में ध्यान-साधना करते थे। उपासकों में उनकी बड़ी ख्याति थी। क्योंकि जब भी लोग मिलने आते, वे नज़र ही नहीं आते — न कुटी के भीतर, न बाहर, न आस-पास — जैसे वाकई निर्वाण में लीन हो गए हों।

ये गोबर की गाड़ी...
हास्ययह किताब दुनियाभर में पसंद की जाती है क्योंकि इसमें जीवन की गहरी बातों को बेहद मज़ेदार और हल्के अंदाज़ में बताया गया है। उनकी हास्यभरी कहानियाँ पढ़ते-पढ़ते आप हँसते भी हैं और अनजाने में कुछ बड़ा समझ भी जाते हैं—यही इसकी खासियत है!


हास्य
धर्म में हास्य मात्र मनोरंजन नहीं, बल्कि गहन बोध और आत्मचिंतन का माध्यम है। हल्के-फुल्के प्रसंग होठों पर मुस्कान लाते हैं और भीतर नई दृष्टि जगाते हैं। जीवन की गंभीर सच्चाइयों को सहज हास्य में ढालना न केवल जटिलता हल्की करता है, बल्कि बोधि-मार्ग भी सुगम बनाता है। प्रस्तुत हैं ऐसे ही कुछ प्रसंग, जहाँ …