हास्य
— इस श्रेणी से संबंधित संपूर्ण संकलन —

अर्हंत बनाम बोधिसत्व
लेखआज १५०० साल बाद, हमारे पास 'बुद्ध के नाम पर खिचड़ी पक चुकी है। थेरवाद, महायान, वज्रयान—सब दावा करते हैं कि वे सही हैं। एक आम साधक कैसे पहचाने कि शुद्ध घी कौन सा है और डालडा कौन सा?

११. केवट्टसुत्तं
सुत्तपिटक / दीघनिकायक्या भिक्षुओं के द्वारा चमत्कार दिखाना उचित है, ताकि लोगों में श्रद्धा बढ़ जाएँ? भगवान का इस पर अविस्मरणीय उत्तर।

२१. ककचूपम सुत्त
सुत्तपिटक / मज्झिमनिकायआलोचना कैसे झेलें? भगवान जीवंत और यादगार उपमाओं के साथ बताते हैं।

२१. सक्कपञ्ह सुत्त
सुत्तपिटक / दीघनिकायदेवताओं का राजा होने के कारण, इन्द्र सक्क, सद्धर्म सुनने से वंचित रहता था। जब भी वह ऋषियों ने धर्म पूछने जाता, ऋषि ही उनसे पूछने लगते। अंततः उसने भगवान से भेंट की और धर्म के उत्तर सुनकर श्रोतापन्न बना।

२४. पाथिक सुत्त
सुत्तपिटक / दीघनिकायसुनक्खत भिक्षु को तमाशेबाज निर्वस्त्र तपस्वियों से आकर्षण है। किन्तु, तप का ऐसा तमाशा न भगवान करते हैं, न ही उनका भिक्षुसंघ। उसके भिक्षुत्व छोड़ने की बात पर, भगवान उसकी अक्ल ठिकाने लगाने की नाकाम कोशिश करते हैं।

३५. चूळसच्चक सुत्त
सुत्तपिटक / मज्झिमनिकायएक प्रसिद्ध अहंकारी बहसबाज 'सच्चक', भगवान से सरेआम वाद-विवाद में भिड़ता है।

७९. चूळसकुलुदायि सुत्त
सुत्तपिटक / मज्झिमनिकायइस रोचक और मजेदार चर्चा से परिव्राजकों का गुरु भिक्षु बनने का मन बनाता है, लेकिन उसके शिष्य उसे रोक देते हैं।

गड्ढा अरहंत
हास्यएक बार श्रीलंका के एक वनवासी भंते, अपनी बांस की कुटी में ध्यान-साधना करते थे। उपासकों में उनकी बड़ी ख्याति थी। क्योंकि जब भी लोग मिलने आते, वे नज़र ही नहीं आते — न कुटी के भीतर, न बाहर, न आस-पास — जैसे वाकई निर्वाण में लीन हो गए हों।

चिंता छोड़ो, चिड़चिड़े रहो!
हास्यविश्व प्रसिद्ध बौद्ध भिक्षु अजान ब्रह्म द्वारा लिखित यह पुस्तिका १०८ मज़ेदार और व्यावहारिक कहानियों का एक ऐसा अनूठा संग्रह है, जो अध्यात्म के पारंपरिक उपदेशों से हटकर बेहद हल्के-फुल्के और मज़ाकिया अंदाज़ में पेश करता है।

मार का पत्र
हास्यइस व्यंग्यात्मक पुस्तक में बुराई का प्रतीक—बौद्ध परंपरा का 'देवपुत्र मार' या सर्वव्यापी 'शैतान'—अपनी फौज को पत्र लिखकर अपनी कुटिल योजनाओं का खुलासा करता है। अच्छाई और बुराई के इस जटिल आध्यात्मिक द्वंद्व को इतने मज़ेदार और हल्के अंदाज़ में बुना गया है कि पाठक हँसते-हँसते ही अनजाने में अकुशल प्रभाव के …

ये गोबर की गाड़ी...
हास्ययह किताब दुनियाभर में पसंद की जाती है क्योंकि इसमें जीवन की गहरी बातों को बेहद मज़ेदार और हल्के अंदाज़ में बताया गया है। उनकी हास्यभरी कहानियाँ पढ़ते-पढ़ते आप हँसते भी हैं और अनजाने में कुछ बड़ा समझ भी जाते हैं—यही इसकी खासियत है!


हास्य
धर्म में हास्य मात्र मनोरंजन नहीं, बल्कि गहन बोध और आत्मचिंतन का माध्यम है। हल्के-फुल्के प्रसंग होठों पर मुस्कान लाते हैं और भीतर नई दृष्टि जगाते हैं। जीवन की गंभीर सच्चाइयों को सहज हास्य में ढालना न केवल जटिलता हल्की करता है, बल्कि बोधि-मार्ग भी सुगम बनाता है। प्रस्तुत हैं ऐसे ही कुछ प्रसंग, जहाँ …