✦ ॥ नमो तस्स भगवतो अरहतो सम्मासम्बुद्धस्स ॥ ✦
एक बौद्ध चुटकुला मुख्य > हास्य > चिंता छोड़ो, चिड़चिड़े रहो! 7. हास्य

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एक बौद्ध चुटकुला

लेखक: अजान ब्रह्म
| 2 मिनट



एक बार एक बौद्ध भिक्षु को उनके मंदिर से जुड़े एक गृहस्थ (उपासक) का फोन आया।

“क्या आप आज मेरे घर आकर आशीर्वाद (पूजा-पाठ) की रस्म पूरी कर देंगे?” फोन करने वाले ने बड़े आदर से पूछा।

“माफ़ करना,” भिक्षु ने जवाब दिया, “मैं नहीं आ सकता क्योंकि मैं अभी बहुत बिज़ी हूँ।”

“आप कर क्या रहे हैं?” उस आदमी ने पूछा।

“कुछ नहीं,” भिक्षु ने बड़े आराम से कहा। “भिक्षुओं का तो काम ही यही होता है—कुछ न करना।”

“ठीक है,” आदमी ने कहा और फोन रख दिया।

अगले दिन उस उपासक ने फिर फोन लगाया। “क्या आप आज मेरे घर आ सकते हैं?”

“माफ़ करना भाई,” भिक्षु ने फिर वही जवाब दिया, “मैं नहीं आ सकता क्योंकि मैं आज भी बहुत बिज़ी हूँ।”

“पर आप कर क्या रहे हैं?” आदमी ने झल्लाकर पूछा।

“कुछ नहीं,” भिक्षु का रटा-रटाया जवाब आया।

“लेकिन… यही ‘कुछ नहीं’ तो आप कल भी कर रहे थे!” उस आदमी ने शिकायत करते हुए कहा।

“हाँ,” भिक्षु ने बड़ी मासूमियत और शांति से कहा, “पर मेरा ‘कुछ न करना’ अभी ख़त्म कहाँ हुआ है!”