एक बार हाथ की पांचों उंगलियों के बीच इस बात पर जोरदार बहस छिड़ गई कि उनमें से ‘सबसे अहम’ कौन है।
अंगूठे ने सीना तानते हुए कहा, “मैं सबसे ज्यादा अहम हूं, क्योंकि मैं सबसे ताकतवर हूं। और तो और, जब लोगों को कोई बात पसंद आती है या किसी चीज को पास करना होता है, तो वे मेरा ही इस्तेमाल करते हैं। मैं ‘ऑल इज वेल’ वाली उंगली हूं!”
“बिल्कुल नहीं!” पहली उंगली ने बात काटते हुए कहा। “सबसे अहम तो मैं हूं। मैं ‘ज्ञान’ की उंगली हूं क्योंकि किसी भी चीज की तरफ इशारा करने या रास्ता दिखाने के लिए मेरा ही इस्तेमाल होता है। और हां, जब लोगों को खुद को ‘नंबर 1’ बताना होता है, तब भी वे मुझे ही उठाते हैं।”
“क्या बकवास है!” बीच वाली उंगली ने मज़ाक उड़ाते हुए कहा। “मैं सबसे बड़ी और लंबी उंगली हूं, इसलिए मैं सबसे दूर तक देख सकती हूं। मैं इतनी ताकतवर हूं कि जब लोग मुझे उठाते हैं, तो सामने वाले बुरी तरह भड़क जाते हैं! और सबसे बड़ी बात, भगवान बुद्ध ने सिखाया है कि मोक्ष का रास्ता ‘मध्यम-मार्ग’ है, और मैं ही वह बीच वाली उंगली हूं।”
“मुझे माफ़ करना, पर तुम सब गलत हो,” चौथी उंगली ने बड़े ही प्यार और नज़ाकत से कहा। “सबसे खास मैं हूं क्योंकि मैं ‘प्यार’ की उंगली हूं। जब लोग प्यार में पड़ते हैं और सगाई करते हैं, तो वे मुझ पर ही अंगूठी पहनाते हैं। जब वे शादी में एक-दूसरे का साथ निभाने की कसम खाते हैं, तब भी अंगूठी मुझ पर ही सजती है। प्यार दुनिया की सबसे बड़ी ताकत है, इसलिए सबसे अहम उंगली मैं ही हूं।”
“ज़रा माफ़ कीजिएगा,” सबसे छोटी उंगली ने बीच में अपनी बात रखी। “मुझे पता है कि मैं लंबी या ताकतवर नहीं हूं और अक्सर मुझे इग्नोर कर दिया जाता है। पर मेरा मानना है कि सबसे अहम उंगली मैं ही हूं। भले ही लोग कान का मैल निकालने जैसे गंदे और छोटे कामों के लिए मेरा इस्तेमाल करते हों, लेकिन… जब वे भगवान बुद्ध के आगे हाथ जोड़कर प्रार्थना करते हैं, तो भगवान के सबसे करीब मैं ही होती हूं! कभी हाथ जोड़कर प्रार्थना करके देखिएगा, आपको खुद समझ आ जाएगा।”
कहानी की कमाल की सीख:
किसी भी समाज, परिवार या मंदिर में, वो नम्र और सीधे-सादे लोग जो सफाई और सेवा का काम करते हैं, असल में वे ही सबसे अहम होते हैं। क्योंकि उस सबसे छोटी उंगली की तरह… वे ही भगवान के सबसे करीब होते हैं!
