✦ ॥ नमो तस्स भगवतो अरहतो सम्मासम्बुद्धस्स ॥ ✦
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तारीफ के पंद्रह सेकंड

लेखक: अजान ब्रह्म
| १ मिनट



मनोविज्ञान के प्रयोगों से यह दिलचस्प बात सामने आई है कि किसी की तारीफ को असल में सुने और समझे जाने में औसतन लगातार पंद्रह सेकंड का समय लगता है। लेकिन आलोचना? वह तो तुरंत तीर की तरह निशाने पर लगती है!

हम लोग तारीफ स्वीकार करने में इतने असहज होते हैं कि अक्सर अपने मन में ऐसे विचारों के साथ उसे तुरंत खारिज कर देते हैं:

“ये आखिर किस बारे में बात कर रही है?”

“क्या इसने पी रखी है या फिर बस पागल हो गया है?”

“हम्म, जरूर इस मीठी-मीठी बात के पीछे कोई छिपा हुआ मकसद है।”

इसलिए, अगर आप अपनी पत्नी को बताना चाहते हैं कि वह कितनी अद्भुत महिला है, या अपने पति से कहना चाहते हैं कि आप उनकी कितनी प्रशंसा करते हैं, तो अपनी स्टॉपवॉच निकाल लीजिए या घड़ी की तरफ देखें और बस बोलते रहें। केवल पंद्रह सेकंड लगातार तारीफ करने के बाद ही वे आपकी तारीफ को असल में गंभीरता से लेंगे!!


कहानी की सीख: सच्ची तारीफ करने में कंजूसी मत कीजिए और ना ही जल्दी हार मानिए। सामने वाले के मन के शक को मिटाकर उसे खुशी का एहसास दिलाने के लिए कम से कम पंद्रह सेकंड का धैर्य तो बनता है!