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70-प्रतिशत का नियम मुख्य > हास्य > चिंता छोड़ो, चिड़चिड़े रहो! 7. हास्य

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70-प्रतिशत का नियम

लेखक: अजान ब्रह्म
| 2 मिनट



भिक्षु बनने से पहले, मैं एक ब्रिटिश हाई स्कूल में शिक्षक हुआ करता था। टीनएजर्स (किशोरों) को पढ़ाना अपने आप में इतना तनावपूर्ण काम है कि किसी का भी मन दुनिया की मोह-माया छोड़कर संन्यासी बनने का कर जाए!

जब मुझे गणित का अपना पहला एग्जाम लेना था, तो मैंने एक सीनियर टीचर से सलाह मांगी। उन्होंने मुझे एक बहुत काम की बात बताई:

“पेपर को बहुत ज्यादा मुश्किल मत बनाना, क्योंकि अगर बच्चों का औसत स्कोर 30-40 प्रतिशत ही रहा, तो वे निराश हो जाएंगे। उन्हें लगने लगेगा कि गणित बहुत मुश्किल है और वे हार मान लेंगे। इसके विपरीत, अगर पेपर बहुत आसान हुआ और औसत अंक 90-100 आ गए, तो फिर उस एग्जाम का कोई मतलब ही नहीं रह जाएगा।”

इसलिए उन्होंने मुझे सलाह दी कि मैं पेपर ऐसा सेट करूं कि बच्चों का औसत स्कोर 70 के आसपास रहे। इस तरह, गणित में अच्छा करने की उनकी क्षमता और आत्मविश्वास को बढ़ावा मिलेगा। और बाकी के 30 प्रतिशत हिस्से में जहां वे गलतियां करेंगे, मैं उनकी कमजोरियों को पहचान पाऊंगा और अगली क्लास में उन्हें सुधार सकूंगा। असल में, वह परीक्षा 70 प्रतिशत उत्साह बढ़ाने के लिए थी और 30 प्रतिशत कुछ नया सीखने के लिए।

बाद में, मुझे एहसास हुआ कि यही बात हमारी जिंदगी पर भी लागू होती है। अगर जीवन की परीक्षाओं में आपका औसत स्कोर केवल 30-40 प्रतिशत है, तो आप निराश हो जाएंगे, डिप्रेशन में चले जाएंगे और हार मान लेंगे। वहीं अगर आप जीवन में हमेशा 95-100 प्रतिशत स्कोर करते हैं, तो आप बहुत कम सीखते हैं और आपका विकास वहीं रुक जाता है।

लेकिन अगर आपके जीवन का स्कोर उस जादुई 70 प्रतिशत के आसपास है, तो आपके पास अपना उत्साह बनाए रखने के लिए पर्याप्त सफलता होती है और एक इंसान के रूप में सीखने और आगे बढ़ने के लिए पर्याप्त असफलता!


कहानी की सीख: जीवन में हर समय 100% परफेक्ट होने के पीछे मत भागिए। थोड़ी सफलता हमें आगे बढ़ने का हौसला देती है, तो थोड़ी असफलता हमें बहुत कुछ सिखाती है। जिंदगी का असली संतुलन और विकास इसी 70-30 के नियम में छिपा है!