✦ ॥ नमो तस्स भगवतो अरहतो सम्मासम्बुद्धस्स ॥ ✦
अंतर्यामी मुख्य > हास्य > चिंता छोड़ो, चिड़चिड़े रहो! 7. हास्य

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अंतर्यामी

लेखक: अजान ब्रह्म
| 2 मिनट



थाईलैंड के पूर्व राजा अपने आस-पास देश के सबसे चतुर और बुद्धिमान लोगों को रखते थे। उन्हीं दरबारियों में से एक दरबारी इतना तेज़-तर्रार था कि उसकी बुद्धिमानी की धार दूसरों को चुभती थी। उसके साथी दरबारियों ने महाराज के सामने उसे शर्मिंदा करके सबक सिखाने की योजना बनाई।

उनकी योजना यह थी कि राजा के सामने उसकी कई योग्यताओं की खूब प्रशंसा की जाए, उसके अहंकार को इतना बढ़ा दिया जाए कि वह उतावलेपन में दूसरों के मन की बात पढ़ने की क्षमता होने का दावा कर बैठे। फिर वे उसे चुनौती देंगे कि वह बताए कि वे सब इस समय क्या सोच रहे हैं। भले ही वह चतुर दरबारी सही अंदाज़ा लगा ले कि वे वास्तव में क्या सोच रहे हैं, वे सब दृढ़ता से कह देंगे कि वह गलत है। आखिर कोई यह कैसे साबित कर सकता है कि कोई दूसरा व्यक्ति अपने दिमाग में क्या सोच रहा है?

इस प्रकार, एक सुबह दरबार में राजा की उपस्थिति में एक के बाद एक मंत्रियों ने उस दरबारी की महान बुद्धिमत्ता और क्षमताओं की जमकर तारीफ की। जब उन्हें लगा कि उसका अहंकार उसके विवेक पर हावी हो चुका है, तो एक मंत्री ने आश्चर्य जताते हुए कहा, “यह व्यक्ति इतना प्रतिभाशाली है कि शायद यह दूसरों के विचारों को भी पढ़ सकता है। क्या यह सच है?”

“बिल्कुल, मैं पढ़ सकता हूँ,” उस दरबारी ने गर्व से कहा।

बाकी दरबारी एक-दूसरे को देखकर मुस्कुराए। वह उनके चालाकी भरे जाल में फंस चुका था।

“ठीक है। तो कृपया महाराज को बताइए कि हम सभी इस समय क्या सोच रहे हैं।”

उन्होंने उसे पकड़ लिया था। उस ‘अंतर्यामी’ के लिए अब बचने का कोई रास्ता नहीं था।

दरबारी ने उत्तर दिया, “महाराज, मैं आपको बताऊंगा कि आपके सभी मंत्री इस समय क्या सोच रहे हैं। वे सभी अपने राजा के प्रति अत्यंत दयालु, आदरपूर्ण और निष्ठा से भरे विचार सोच रहे हैं।”

सभी मंत्रियों ने कुछ सेकंड के लिए विचार किया और तुरंत एक स्वर में सहमत हुए, “हाँ, महाराज! हम सभी बिल्कुल यही विचार सोच रहे हैं!”

इसे कहते हैं अंतर्यामी!


कहानी की सीख: सच्ची बुद्धिमानी केवल तर्क या ज्ञान में नहीं, बल्कि परिस्थिति के अनुसार हाजिरजवाबी और व्यावहारिक समझ में होती है। जब विरोधी आपको अपने जाल में फंसाने की कोशिश कर रहे हों, तो अपनी चतुरता का उपयोग इस तरह करना चाहिए कि वे चाहकर भी आपका विरोध न कर सकें। उस दरबारी ने अपनी बुद्धि से न केवल राजा का दिल जीता, बल्कि अपने दुश्मनों का मुंह भी हमेशा के लिए बंद कर दिया।