✦ ॥ नमो तस्स भगवतो अरहतो सम्मासम्बुद्धस्स ॥ ✦
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दो आम के पेड़ों की कहानी

लेखक: अजान ब्रह्म
| 2 मिनट



बुद्ध ने एक शक्तिशाली राजा की कहानी सुनाई, जो अपनी सेना के एक युद्ध-अभ्यास का निरीक्षण करने के बाद महल लौट रहा था। रास्ते में वह दो आम के पेड़ों के पास से गुज़रा, जिनमें से एक खुशबूदार, पके हुए आमों से पूरी तरह लदा हुआ था, जबकि दूसरे पेड़ पर एक भी फल नहीं था। राजा ने फलहीन पेड़ की उपेक्षा की और मन में यह संकल्प लिया कि वह महल जाकर अपनी सैन्य पोशाक बदलेगा और बाद में इस फलदार पेड़ के पास वापस आकर आमों की शानदार दावत का आनंद लेगा।

जब राजा कुछ समय बाद वापस लौटा, तो वह देखकर दंग रह गया कि जिस पेड़ पर इतने सारे पके आम थे, उसे फल तोड़ने के लिए बेरहमी से उजाड़ दिया गया था। उसके सैनिकों ने फल खाने के लिए अपनी पोशाक बदलने तक का इंतज़ार नहीं किया था। और तो और, उस पेड़ की इतनी सारी टहनियाँ टूट चुकी थीं और पत्ते झड़ चुके थे कि अब वह बिल्कुल विकृत और बीमार जैसा दिखाई दे रहा था। दूसरी ओर, जिस आम के पेड़ पर कोई फल नहीं था, उसे सेना ने छुआ तक नहीं था और वह पहले की तरह ही हरा-भरा, स्वस्थ और मजबूत दिख रहा था।

उस बुद्धिमान राजा ने अगले ही दिन अपना राजपाठ त्याग दिया और एक भिक्षु बन गया। एक अमीर राजा होना उस पेड़ की तरह होने जैसा था जो फलों से लदा हो। साज़िशी मंत्री, राजकुमार और यहाँ तक कि पड़ोसी देश भी उसकी संपत्ति को हथियाने की ताक में रहते थे। यह केवल समय की बात थी कि वे कब उस पर हमला कर देते और उसे घायल या मार डालते—बिल्कुल उसी तरह जैसे उस फलदार पेड़ को बुरी तरह क्षत-विक्षत कर दिया गया था।

इससे कहीं बेहतर था कि एक भिक्षु की तरह बहुत कम वस्तुएं पास में हों; तब वह बिना आम वाले उस पेड़ की तरह जी सकता था—स्वस्थ, मजबूत और दूसरों को हमेशा ठंडी छाँव देने के लिए तैयार।