कई लोगों के पास एक फोटो एलबम होता है। उसमें वे अपनी ज़िंदगी के सबसे खुशनुमा पलों की यादें सँजो कर रखते हैं। शायद बचपन में समंदर किनारे मिट्टी में सनकर खेलते हुए कोई फोटो हो। या फिर ग्रेजुएशन के दिन गर्व से सीना चौड़ा किए माँ-बाप के साथ कोई तस्वीर। शादी की ढेरों तस्वीरें होंगी जो उनके प्यार के सबसे हसीन पलों को कैद करती हैं। और हाँ, छुट्टियों (हॉलिडे) की मज़ेदार तस्वीरें भी तो होंगी।
लेकिन आपको अपने एलबम में अपनी ज़िंदगी के किसी ‘मनहूस’ या दुखी पल की तस्वीर कभी नहीं मिलेगी। स्कूल में प्रिंसिपल के ऑफिस के बाहर सहमे हुए खड़े होने की कोई फोटो वहाँ नहीं होती। देर रात तक जागकर परीक्षा के लिए रट्टा मारते हुए कोई तस्वीर गायब रहती है। मेरी जान-पहचान में तो ऐसा कोई इंसान नहीं है जिसके एलबम में उसके ‘तलाक’ की कोई तस्वीर हो, या अस्पताल के बिस्तर पर भयंकर बीमार पड़े होने की फोटो हो, या फिर सोमवार की मनहूस सुबह ऑफिस जाते हुए भयंकर ट्रैफिक जाम में फँसे होने की तस्वीर हो! ऐसी डिप्रेस करने वाली तस्वीरें किसी के भी असली फोटो एलबम में कभी जगह नहीं बना पातीं।
लेकिन… हमारे दिमाग के भीतर भी एक और फोटो एलबम होता है जिसे हम ‘यादें’ कहते हैं। और कमाल की बात देखिए, उस एलबम में हम दुनिया भर की ‘नेगेटिव’ तस्वीरें ठूँस-ठूँस कर भर लेते हैं! वहाँ आपको बेइज़्ज़ती भरी बहसों के ढेरों स्नैपशॉट मिल जाएंगे, उन पलों की कई तस्वीरें होंगी जब किसी ने आपको बुरी तरह धोखा दिया या आपका दिल तोड़ा, और उन मौकों का पूरा का पूरा कोलाज मिलेगा जब आपके साथ बुरा या ज़ालिम बर्ताव किया गया। हैरानी की बात तो यह है कि उस दिमागी एलबम में खुशी के पलों की तस्वीरें ना के बराबर होती हैं।
यह तो हद दर्जे का पागलपन है!
तो चलिए, आज अपने दिमाग वाले इस फोटो एलबम की ज़रा ‘सफाई’ करते हैं। उन सभी सड़ी-गली और उदास करने वाली यादों को ‘डिलीट’ कर दीजिए। उन्हें उठाकर सीधा कचरे के डिब्बे में डाल दीजिए। इस एलबम में उनकी कोई जगह नहीं है। उनकी जगह, ठीक वैसी ही यादों को रखिए जिन्हें आप अपने असली फोटो एलबम में रखते हैं।
अपने पार्टनर के साथ झगड़े के बाद हुए उस प्यारे से ‘पैच-अप’ की खुशी को वहाँ चिपकाइए; किसी अजनबी से अचानक मिली उस सच्ची नेकी और मदद को सहेज कर रखिए; या फिर उस पल को सजाइए जब काले बादलों के बीच से सूरज की कोई बेहद खूबसूरत किरण झाँकी हो। ऐसी ही अच्छी तस्वीरों को अपनी यादों के एलबम में रखिए।
फिर देखिएगा, जब भी आपके पास फुर्सत के कुछ पल होंगे, आप इस दिमागी एलबम के पन्ने एक प्यारी सी मुस्कान… या शायद एक ज़ोरदार ठहाके के साथ पलट रहे होंगे।
