अजान ब्रह्म के बारे में

अजान ब्रह्मवंसो महाथेरा (जिन्हें लोग प्यार से अजान ब्रह्म नाम से जानते हैं) का जन्म ७ अगस्त, १९५१ को लंदन, यूनाइटेड किंगडम में पीटर बेट्स के रूप में हुआ था। वे एक श्रमिक वर्ग के परिवार से थे।
१९६० के दशक के उत्तरार्ध में उन्होंने कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी से सैद्धांतिक भौतिकी (Theoretical Physics) की पढ़ाई करने के लिए एक स्कॉलरशिप (छात्रवृत्ति) जीती। स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद, उन्होंने एक वर्ष तक हाई स्कूल में पढ़ाया और फिर बौद्ध भिक्षु बनने तथा परम श्रद्धेय अजान चाह बोधिञाण महाथेरा के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण लेने के लिए थाईलैंड चले गए।
अपने भिक्षु जीवन के शुरुआती वर्षों में ही, उन्हें बौद्ध भिक्षुओं के नियमों की संहिता—‘विनय’—का अंग्रेजी भाषा में एक गाइड तैयार करने का काम सौंपा गया। बाद में यही संकलन पश्चिमी देशों के कई थेरवाद बौद्ध विहारों में भिक्षुओं के अनुशासन का मुख्य आधार बना।
उस समय के युवा भिक्षु श्रद्धेय ब्रह्म को ‘बौद्ध सोसाइटी ऑफ वेस्टर्न ऑस्ट्रेलिया’ (Buddhist Society of Western Australia) द्वारा अजान जगारो की शिक्षण कार्यों में मदद करने के लिए पर्थ, ऑस्ट्रेलिया आमंत्रित किया गया था। शुरुआत में वे दोनों उत्तरी पर्थ के एक उपनगर में स्थित एक पुराने घर में रहते थे, लेकिन १९८३ के अंत में उन्होंने पर्थ के दक्षिण में स्थित सर्पेन्टाइन की पहाड़ियों में ९७ एकड़ ग्रामीण और जंगली भूमि खरीदी। इस भूमि पर ‘बोधिञाण विहार’ की स्थापना की जानी थी (जिसका नाम उनके गुरु, अजान चाह बोधिञाण के नाम पर रखा गया था)।
बोधिञाण विहार दक्षिणी गोलार्ध में पहला समर्पित बौद्ध विहार बना और आज यह ऑस्ट्रेलिया में थेरवाद बौद्ध भिक्षुओं का सबसे बड़ा समुदाय है।
शुरुआत में उस ज़मीन पर कोई इमारत नहीं थी। चूंकि उस समय पर्थ में बहुत कम बौद्ध थे और धन की भारी कमी थी, इसलिए पैसे बचाने के लिए भिक्षुओं ने खुद ही निर्माण कार्य शुरू कर दिया। इसी दौरान अजान ब्रह्म ने प्लंबिंग (नलसाजी) और राजमिस्त्री का काम सीखा और वहां की वर्तमान इमारतों में से कई को अपने हाथों से बनाया।
१९९४ में, अजान जगारो ने पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया से एक लंबी छुट्टी ली और एक साल बाद भिक्षु जीवन छोड़ दिया, जिससे अचानक विहार की पूरी ज़िम्मेदारी अजान ब्रह्म के कंधों पर आ गई। शुरुआती हिचकिचाहट के बावजूद, अजान ब्रह्म ने इस भूमिका को पूरे उत्साह के साथ स्वीकार किया। जल्द ही उन्हें ऑस्ट्रेलिया के अन्य हिस्सों और दक्षिण-पूर्व एशिया में अपने मज़ाकिया और प्रेरणादायक प्रवचन देने के लिए आमंत्रित किया जाने लगा।
उन्होंने २००२ में फ़्नोम पेन्ह में ‘अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध शिखर सम्मेलन’ और चार ‘वैश्विक बौद्ध सम्मेलनों’ में मुख्य वक्ता के रूप में भाग लिया। वे जून २००६ में पर्थ में आयोजित चौथे वैश्विक बौद्ध सम्मेलन के संयोजक भी थे। लेकिन इस वैश्विक पहचान के बाद भी उन्होंने बीमारों, मरणासन्न लोगों, जेल के कैदियों, कैंसर से पीड़ित लोगों, ध्यान सीखने के इच्छुक आम लोगों और निश्चित रूप से बोधिञाण में अपने भिक्षु संघ की सेवा और ध्यान रखने में कभी कोई कमी नहीं आने दी।
वर्तमान में, अजान ब्रह्म सर्पेन्टाइन, पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया में स्थित बोधिञाण विहार के मठाधीश हैं। इसके साथ ही वे बौद्ध सोसाइटी ऑफ वेस्टर्न ऑस्ट्रेलिया के आध्यात्मिक निदेशक, बौद्ध सोसाइटी ऑफ विक्टोरिया व बौद्ध सोसाइटी ऑफ साउथ ऑस्ट्रेलिया के आध्यात्मिक सलाहकार और सिंगापुर में बौद्ध फैलोशिप के आध्यात्मिक संरक्षक हैं। वे ‘ऑस्ट्रेलियाई संघ एसोसिएशन’ की स्थापना के लिए सभी बौद्ध परंपराओं के भिक्षुओं और भिक्षुणियों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं।
अक्टूबर २००४ में, अजान ब्रह्म को उनकी दूरदर्शिता, नेतृत्व और ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के प्रति उनकी निस्वार्थ सेवा के लिए कर्टिन यूनिवर्सिटी द्वारा प्रतिष्ठित ‘जॉन कर्टिन मेडल’ से सम्मानित किया गया।
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