केले में बड़ा गहरा फलसफा छिपा है!
ये इतने आम हैं कि हमें लगता है, “अरे, केला ही तो है, इसके बारे में क्या ही जानना!” पर सच तो यह है कि हमें ठीक से एक केला छीलना तक नहीं आता!
ज़्यादातर लोग केले को उसके डंठल (ऊपर वाले हिस्से) की तरफ से छीलते हैं। लेकिन ज़रा बंदरों को देखिए—जो कि केलों के असली ‘उस्ताद’ हैं—वे हमेशा डंठल को पकड़ते हैं और केले को एकदम उल्टी तरफ (नीचे) से छीलते हैं। कभी आज़मा कर देखिएगा। आप खुद मान जाएंगे कि इस “बंदर-छाप तरीके” से केला छीलना कितना आसान है और इसमें कोई झंझट भी नहीं होता।
बिल्कुल इसी तरह, ध्यान करने वाले बौद्ध भिक्षु और भिक्षुणियां भी उस्ताद होते हैं—पर केले के नहीं, बल्कि हमारे मन को आस-पास की उलझनों और परेशानियों से छीलकर अलग करने के! मैं आपको न्योता देता हूँ कि आप भी ज़िंदगी की मुसीबतों से निपटने के लिए इस “भिक्षु-छाप तरीके” को आज़मा कर देखें।
यकीन मानिए, सही तरीके से केला छीलने की तरह ही, आपको यह ज़िंदगी भी बहुत कम झंझटों वाली और कहीं ज़्यादा मज़ेदार लगने लगेगी!
