मार का अपने सेनापतियों को फरमान
लिखने वाला: परम श्रेष्ठ महामहिम मार नमुचि!
प्रति: समस्त सेनादल प्रमुख!
कार्यक्षेत्र: पृथ्वी ग्रह, सौरमंडल, मनुष्य-लोक!
विषय: वर्तमान परिस्थिति एवं चल रही परियोजनाओं की स्थिति!
दिनांक: वर्तमान बुद्ध-काल की छब्बीसवीं सदी
मेरे सभी मेहनती सेवकों को सलाम!
जैसा कि आप सभी जानते हैं, हमारी समग्र रणनीति हमेशा की तरह बखूबी काम कर रही है। हमारे इस छोटे से खेल के मैदान—महासंसार—में भटकने वाले असंख्य सत्व, अपनी असली दुर्दशा से बिल्कुल अनजान हैं। हमें उन्हें अपनी मुट्ठी में बनाए रखने की अपनी अथक कोशिशें जारी रखनी होंगी।
यह सच है कि एक—कहें तो—बहुत चालाक मछली ढाई हज़ार साल पहले हमारे जाल से निकल गई। उस हादसे की पूरी ज़िम्मेदारी मैं खुद लेता हूँ। चूँकि आप सभी ने बुनियादी प्रशिक्षण से वह इतिहास पढ़ा है, इसलिए मुझे विस्तार में जाने की ज़रूरत नहीं—बस याद रखें कि मैंने अपनी पूरी कोशिश की थी। यहाँ तक कि मेरी बेटियों ने उसके सामने नृत्य किया—पर वह टला नहीं।
मेरा वह भयानक रूप, जिसे देखकर कभी-कभी मैं खुद भी सिहर जाता हूँ—उस पर भी कोई असर नहीं हुआ। और इससे भी बुरा यह कि जब उसने हमारे इस खेल की असली हकीकत जान ली, तो मैं उसे यह राज़ अपने तक रखने के लिए मना न सका—हालाँकि मुझे लगा था कि मैं लगभग राज़ी कर ही चुका था।
खैर, जो हो गया सो हो गया। हमारे जाल में एक छोटा-सा छेद है जिससे सत्व निकलते रहते हैं। पर खुशी की बात यह है कि सारे संकेत बताते हैं कि वह छेद वक्त के साथ छोटा होता जा रहा है। हमारी इन छोटी-छोटी मछलियों के लिए यह सोचना बेहद मुश्किल है कि उनकी असली भलाई जाल के बाहर है—हमें बस उन्हें उस “कैनिंग फैक्ट्री” 1 के ख्याल से दूर रखना है!
आप सभी वफादार सेनादल प्रमुख बहुत अच्छा काम कर रहे हैं। आइए इस मौके पर आपके विभागों की एक-एक करके समीक्षा करते हैं।
मार चाहता है कि मछलियाँ (दुनिया के सत्व) यह न सोचें कि जाल में फँसने के बाद उनका क्या होगा। जैसे मछलियाँ अगर जानतीं कि जाल के बाद कैनिंग फैक्ट्री है—यानी मौत—तो वे जाल से बचने की पूरी कोशिश करतीं। यानी—सत्वों को मृत्यु, अनित्यता और दुख की असली सच्चाई का एहसास मत होने दो। यही मार की सबसे बड़ी चाल है। ↩︎
