✦ ॥ नमो तस्स भगवतो अरहतो सम्मासम्बुद्धस्स ॥ ✦
१-२१. निग्रोध मुख्य > सुत्तपिटक > थेरगाथा

निग्रोध

अनुवादक: सोनल आवळे | २ मिनट
श्रावस्ती के एक विख्यात ब्राह्मण परिवार में जन्मे निग्रोध भगवान की शरण में आकर प्रवर्जित हुए। कठोर साधना के उपरांत जब उन्होंने अर्हत्व की प्राप्ति की, तब अपने अंतर्मन के ‘अभय’ (निडरता) को प्रकट करते हुए उन्होंने यह उदान गाया:

हिन्दी

“मैं (मृत्यु इत्यादि) भयानक बातों से नहीं डरता,
हमारे शास्ता ने अमृत को जाना है।
जहाँ तनिक भी भय नहीं,
उसी (आर्य) मार्ग से भिक्षु चला हैं।”


पालि

“नाहं भयस्स भायामि,
सत्था नो अमतस्स कोविदो।
यत्थ भयं नावतिट्ठाति,
तेन मग्गेन वजन्ति भिक्खवो” ति।