✦ ॥ नमो तस्स भगवतो अरहतो सम्मासम्बुद्धस्स ॥ ✦
१-२४. सुगन्ध मुख्य > सुत्तपिटक > थेरगाथा

सुगन्ध

अनुवादक: सोनल आवळे | २ मिनट
श्रावस्ती के एक धनी परिवार में जन्मे सुगन्ध ने प्रवज्या ली। उनकी साधना इतनी तीव्र और सटीक थी कि प्रव्रज्या (दीक्षा) लेने के मात्र सात दिनों के भीतर ही उन्होंने अर्हन्त पद प्राप्त कर लिया। अपनी इस अद्भुत आध्यात्मिक सफलता पर हर्ष व्यक्त करते हुए सुगन्ध स्थविर ने यह उदान गाया:

हिन्दी

“वर्षा के बाद ही हुआ मैं प्रव्रजित,
धर्म की महिमा देखो;
तीन विद्याओं कि की मैंने प्राप्ती,
बुद्ध-शासन को पूरा किया।”


पालि

“अनुवस्सिको पब्बजितो,
पस्स धम्मसुधम्मतं।
तिस्सो विज्जा अनुप्पत्ता,
कतं बुद्धस्स सासनं” ति।