✦ ॥ नमो तस्स भगवतो अरहतो सम्मासम्बुद्धस्स ॥ ✦
१-४२. खदिरवनिय मुख्य > सुत्तपिटक > थेरगाथा

खदिरवनिय

अनुवादक: सोनल आवळे | २ मिनट

भगवान के अग्रश्रावक सारिपुत्र के सबसे छोटे भाई रेवत, अपने बड़े भाई के पदचिह्नों पर चलते हुए प्रव्रजित हुए थे। उन्हें अरण्यवासी भिक्षुओं में सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। उनकी तीन बहनें—चाला, उपचाला और सिसूपचाला—भी प्रव्रजित होकर उन्हीं के मार्गदर्शन में साधना करती थीं। एक बार जब रेवत स्थविर अस्वस्थ हुए, तब उनके अग्रज सारिपुत्र उन्हें देखने अरण्य की ओर आए।

सारिपुत्र को दूर से आते देखकर रेवत स्थविर ने अपनी बहनों को सचेत करते हुए यह उदान कहा:

हिन्दी

“चाला, उपचाला, सिसूपचाला,
तुम धर्म में प्रतिष्ठित रहो,
होकर सजग तुम साधना में,
सदा ही लगी रहो।
समझ लो अच्छी तरह कि मार तुम्हारे पीछे है,
पकड़ने को जैसे व्याघ्र किसी मृग के पीछे है।”


पालि

“चाले उपचाले सीसूपचाले,
पतिस्सता नु खो विहरथ।
आगतो वो वालं विय वेधी” ति।