✦ ॥ नमो तस्स भगवतो अरहतो सम्मासम्बुद्धस्स ॥ ✦
१-८३. सीह मुख्य > सुत्तपिटक > थेरगाथा

सीह

अनुवादक: सोनल आवळे | २ मिनट

मल्ल जनपद के एक राजकुमार सीह थे। भगवान से उपदेश सुनकर वे प्रव्रजित तो हुए, किन्तु उनका मन अक्सर विक्षिप्त रहता था। उनकी यह दशा देखकर एक दिन भगवान ने उन्हें उपदेश दिया। उस उपदेश से प्रेरणा प्राप्त कर उन्होंने साधना की और अर्हत पद को प्राप्त किया।

भगवान के जिन शब्दों से उन्हें दिशा मिली, उन्हीं शब्दों में सीह स्थविर ने यह उदान कहा:

हिन्दी

“हे सिंह! सिंह के सदृश अप्रमत्त हो,
रात-दिन तुम विचरण करो।
कुशल धर्म की भावना कर,
चित्त-क्लेश राशि का शीघ्र त्याग करो।”


पालि

“सीहप्पमत्तो विहर,
रत्तिन्दिवमतन्दितो,
भावेहि कुसलं धम्मं,
जह सीघं समुस्सय"न्ति।