✦ ॥ नमो तस्स भगवतो अरहतो सम्मासम्बुद्धस्स ॥ ✦
१-९७. तिस्स (दुतिय) मुख्य > सुत्तपिटक > थेरगाथा

तिस्स (दुतिय)

अनुवादक: सोनल आवळे | २ मिनट

हिन्दी

“सौ पलभार काँसे का,
और सोने के बने,
बहुमूल्य सुन्दर पात्रों को त्यागकर।
मिट्टी के पात्र को,
स्वीकार लिया है,
मेरा दूसरा अभिषेक है यह।”


पालि

“हित्वा सतपलं कंसं,
सोवण्णं सतराजिकं ।
अग्गर्हि मत्तिकापत्तं,
इदं दुनियाभिसेचनं” ति।