✦ ॥ नमो तस्स भगवतो अरहतो सम्मासम्बुद्धस्स ॥ ✦
१-९८. अभय मुख्य > सुत्तपिटक > थेरगाथा

अभय

अनुवादक: सोनल आवळे | २ मिनट
श्रावस्ती के ब्राह्मण कुल में उत्पन्न, भगवान से उपदेश सुनकर वे प्रव्रजित हुए। एक दिन भिक्षाटन हेतु गाँव में गए और वहां एक सुन्दर स्त्री को देखकर उनके मन में विकार उत्पन्न हुआ। इस घटना पर मनन करते हुए वे और अधिक उद्योगी हुए और शीघ्र ही अर्हत पद को प्राप्त किया। उक्त घटना को लक्ष्य कर, अभय स्थविर ने यह उदान कहा:

हिन्दी

“प्रिय निमित्त रूप को देखकर,
मन में लाने पर स्मृति नष्ट हो गयी।
आसक्त चित्त से लेता जो आनन्द,
मन उसमें पैठ, समा जाता है वही॥

इस प्रकार जन्म के मूल कारण,
दुःख की ओर ले जानेवाले होते है,
आश्रव उसके बढ़ जाते हैं।”


पालि

“रूपं दिवा सति मुट्ठा,
पियं निमित्तं मनसिकरोतो ।
सारत्तचित्तो वेदेति,
तं च अज्झोस तिद्वति ।
तस्स वहन्ति आसवा,
भवमूलोपगामिनो” ति।