✦ ॥ नमो तस्स भगवतो अरहतो सम्मासम्बुद्धस्स ॥ ✦
विषय दर्शन

अरूप आयाम

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  • ५२. अट्ठकनागर सुत्त

    ५२. अट्ठकनागर सुत्त

    सुत्तपिटक / मज्झिमनिकाय

    एक गृहस्थ भगवान के परिनिर्वाण के पश्चात अमृतद्वार ढूँढ रहा था। आनन्द भन्ते ने उसे एक नहीं, ग्यारह अमृतद्वार दिखाते हैं।