विषय दर्शन
अविचलता
— इस विषय से संबंधित संपूर्ण संकलन —

१०२. पञ्चत्तय सुत्त
सुत्तपिटक / मज्झिमनिकायपाँच और तीन—यह सूत्र प्रसिद्ध ब्रह्मजालसुत्त के समान है, केवल मध्यम-लंबाई का है।

१०२. पञ्चत्तय सुत्त
सुत्तपिटक / मज्झिमनिकायपाँच और तीन—यह सूत्र प्रसिद्ध ब्रह्मजालसुत्त के समान है, केवल मध्यम-लंबाई का है।

१०५. सुनक्खत्त सुत्त
सुत्तपिटक / मज्झिमनिकायजो भिक्षु स्वयं को ऊँचा आँक कर, अरहंत मानकर, साधना छोड़ देता है, उस पर भगवान का धम्मोपदेश।

१०६. आनेञ्जसप्पाय सुत्त
सुत्तपिटक / मज्झिमनिकाययहाँ भगवान कामुकता से परे जाने के ठोस साधना-मार्ग बताते हैं, और अंततः उन्हें भी लाँघने की प्रेरणा देते हैं।