विषय दर्शन
आत्मभाव
— इस विषय से संबंधित संपूर्ण संकलन —

२८. सम्पसादनीयसुत्त
सुत्तपिटक / दीघनिकायपरिनिर्वाण लेने से पूर्व, आयुष्मान सारिपुत्त आकर भगवान से मुलाक़ात करते है, और महान शास्ता के लिए भाव-विभोर बातें कहते हैं।

११४. सेवितब्बासेवितब्ब सुत्त
सुत्तपिटक / मज्झिमनिकायभगवान यहाँ धम्म की जटिलता को हटाकर एक सीधा मापदंड सामने रखते हैं—कि कौन-सी बात अपनाने योग्य है और कौन-सी नहीं।