✦ ॥ नमो तस्स भगवतो अरहतो सम्मासम्बुद्धस्स ॥ ✦
विषय दर्शन

आर्य अष्टांगिक मार्ग

— इस विषय से संबंधित संपूर्ण संकलन —

  • आर्य अष्टांगिक मार्ग की भावना

    आर्य अष्टांगिक मार्ग की भावना

    लेख

    इसे 'आर्य' इसलिए कहा गया है क्योंकि जब इसके आठों अंग पूर्ण रूप से विकसित हो जाते हैं, तब यह किसी भी साधारण मनुष्य को पूर्णतः बदलकर संबोधि के प्रथम सोपान—श्रोतापत्ति—पर खड़ा कर देता है और उसे 'आर्य-जन' बना देता है।

  • ११७. महाचत्तारीसक सुत्त

    ११७. महाचत्तारीसक सुत्त

    सुत्तपिटक / मज्झिमनिकाय

    इस सूत्र में भगवान आर्य अष्टांगिक मार्ग के सात अंगों की 'लौकिक' और 'आर्य' परिभाषाएँ देते हैं और उनके आपसी संबंध को स्पष्ट करते हैं।