विषय दर्शन
आर्य सत्य
— इस विषय से संबंधित संपूर्ण संकलन —

बुद्ध का क्रमिक उपदेश
लेखबुद्ध ने कभी धर्म को एक ही साँचे में नहीं ढाला। वे श्रोता की क्षमता, उसकी जिज्ञासा और उसके मन की स्थिति को ध्यान में रखकर ही, क्रमबद्ध रूप से, धर्म को प्रकट करते—इसी को 'अनुपुब्बिकथा' कहा गया है।

पुनर्जन्म का आर्यसत्य
ग्रन्थ / पुनर्जन्म की सच्चाईअपने श्रोताओं को सांसारिक सही दृष्टिकोण से पारलौकिक सही दृष्टिकोण की ओर ले जाने के लिए, बुद्ध ने पुनर्जन्म पर शिक्षा का उपयोग न केवल अपने श्रोताओं में सावधानी की भावना को प्रेरित करने के लिए किया, बल्कि संवेग की भावना भी पैदा की: पुनर्जन्म से मुक्ति न मिलने की संभावना पर निराशा और भय।

१६. महापरिनिब्बान सुत्त
सुत्तपिटक / दीघनिकाययह पालि साहित्य का सबसे लंबा सूत्र है, जो बुद्ध की परिनिर्वाण कथा को विवरण के साथ बताता है। भगवान बुद्ध के अंतिम दिनों के बारे में यहाँ लंबा ब्योरा मिलता है, जिससे बुद्ध के व्यक्तित्व की गहराई झलकती है।