चमत्कार
— इस विषय से संबंधित संपूर्ण संकलन —

६. महालिसुत्तं
सुत्तपिटक / दीघनिकायइसमें भगवान विभिन्न उपासकों को दिव्य-रूप देखने और दिव्य-आवाज सुनने के बारे में बताते हैं। किन्तु उसके परे की उत्कृष्ठ चीजों को साक्षात्कार करने का मार्ग भी बताते हैं।

११. केवट्टसुत्तं
सुत्तपिटक / दीघनिकायक्या भिक्षुओं के द्वारा चमत्कार दिखाना उचित है, ताकि लोगों में श्रद्धा बढ़ जाएँ? भगवान का इस पर अविस्मरणीय उत्तर।

१६. महापरिनिब्बान सुत्त
सुत्तपिटक / दीघनिकाययह पालि साहित्य का सबसे लंबा सूत्र है, जो बुद्ध की परिनिर्वाण कथा को विवरण के साथ बताता है। भगवान बुद्ध के अंतिम दिनों के बारे में यहाँ लंबा ब्योरा मिलता है, जिससे बुद्ध के व्यक्तित्व की गहराई झलकती है।

२४. पाथिक सुत्त
सुत्तपिटक / दीघनिकायसुनक्खत भिक्षु को तमाशेबाज निर्वस्त्र तपस्वियों से आकर्षण है। किन्तु, तप का ऐसा तमाशा न भगवान करते हैं, न ही उनका भिक्षुसंघ। उसके भिक्षुत्व छोड़ने की बात पर, भगवान उसकी अक्ल ठिकाने लगाने की नाकाम कोशिश करते हैं।

२८. सम्पसादनीयसुत्त
सुत्तपिटक / दीघनिकायपरिनिर्वाण लेने से पूर्व, आयुष्मान सारिपुत्त आकर भगवान से मुलाक़ात करते है, और महान शास्ता के लिए भाव-विभोर बातें कहते हैं।

३१. चूळगोसिङ्ग सुत्त
सुत्तपिटक / मज्झिमनिकायकलह के समय, भगवान उन तीन भिक्षुओं से मिलते हैं जो स्नेहपूर्वक वन में साधनारत हैं।

३७. चूळतण्हासङ्खय सुत्त
सुत्तपिटक / मज्झिमनिकायभगवान से धम्म सुनने पर भी देवराज इन्द्र मदहोश रहता है। तब महामोग्गल्लान भन्ते उसके रोंगटे खड़े कर उसे होश दिलाते हैं।