✦ ॥ नमो तस्स भगवतो अरहतो सम्मासम्बुद्धस्स ॥ ✦
विषय दर्शन

तपस्या

— इस विषय से संबंधित संपूर्ण संकलन —

  • गोतम बुद्ध की दुष्कर चर्या

    गोतम बुद्ध की दुष्कर चर्या

    लेख

    इतिहास का सबसे कठिन अध्याय—जहाँ एक मनुष्य ने अपने शरीर को मिटा देने की हद तक जाकर सत्य को ललकारा।

  • ८. महासीहनादसुत्तं

    ८. महासीहनादसुत्तं

    सुत्तपिटक / दीघनिकाय

    एक नंगे साधु को काया का कठोर तप करने में ही राग है। किन्तु भगवान उसे बताते हैं कि तब भी उसका मन दूषित रह सकता है।

  • ८. सल्लेख सुत्त

    ८. सल्लेख सुत्त

    सुत्तपिटक / मज्झिमनिकाय

    भगवान बताते हैं कि साधक को, सुख और शान्ति में रमने के बजाय, अपने क्लेशों को ‘घिस-घिसकर मिटाने’ की तपश्चर्या करनी चाहिए।

  • १२. महासीहनाद सुत्त

    १२. महासीहनाद सुत्त

    सुत्तपिटक / मज्झिमनिकाय

    एक पूर्व शिष्य के द्वारा निंदा होने पर, भगवान ऐसा उत्तर देते हैं कि सुनने वाले के रोंगटे खड़े हो जाए।

  • २५. उदुम्बरिक सुत्त

    २५. उदुम्बरिक सुत्त

    सुत्तपिटक / दीघनिकाय

    यह सूत्र विभिन्न धर्मों के बीच होने वाले संवाद का एक बेहतरीन उदाहरण है। बुद्ध का आशय किसी को ‘बौद्ध’ बनाना नहीं, बल्कि उन्हें दुःखों से मुक्त करना है।

  • ५१. कन्दरक सुत्त

    ५१. कन्दरक सुत्त

    सुत्तपिटक / मज्झिमनिकाय

    'पशुओं का स्वभाव सीधा होता है, जबकि मानव स्वभाव का कोई भरोसा नहीं!' इस बात पर भगवान चार प्रकार के व्यक्तियों का वर्णन करते हैं।

  • ६०. अपण्णक सुत्त

    ६०. अपण्णक सुत्त

    सुत्तपिटक / मज्झिमनिकाय

    यदि आपको किसी पर श्रद्धा न हो तो तर्क का आधार लेकर सुरक्षित दाँव लगाना चाहिए।

  • ९४. घोटमुख सुत्त

    ९४. घोटमुख सुत्त

    सुत्तपिटक / मज्झिमनिकाय

    टहलते हुए आया एक अनजान ब्राह्मण भिक्षु से कह उठता है, “प्रव्रज्या अधार्मिक है!” तब भन्ते उसे धम्म बताते हैं।