✦ ॥ नमो तस्स भगवतो अरहतो सम्मासम्बुद्धस्स ॥ ✦
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— इस विषय से संबंधित संपूर्ण संकलन —

  • धम्म और अद्वैत

    धम्म और अद्वैत

    लेख

    हाल के वर्षों में थेरवाद बौद्ध धर्म के सामने एक बड़ी चुनौती रही है—शास्त्रीय थेरवाद विपश्यना ध्यान और 'अद्वैतवादी' ध्यान परंपराओं (जिनका प्रतिनिधित्व मुख्य रूप से अद्वैत वेदांत और महायान बौद्ध धर्म करते हैं) का आमना-सामना...

  • २. सब्बासव सुत्त

    २. सब्बासव सुत्त

    सुत्तपिटक / मज्झिमनिकाय

    सभी आस्रवों को खत्म करने के कुल सात उपाय!

  • ११. चूळसीहनाद सुत्त

    ११. चूळसीहनाद सुत्त

    सुत्तपिटक / मज्झिमनिकाय

    भगवान प्रेरित करते हैं कि उनके शिष्य जाकर दूसरे संन्यासियों के सामने दहाड़े।

  • १२. लोहिच्चसुत्तं

    १२. लोहिच्चसुत्तं

    सुत्तपिटक / दीघनिकाय

    क्या किसी की अध्यात्मिक सहायता नहीं करनी चाहिए? एक ब्राह्मण की दृष्टि का भगवान निवारण करते हैं।

  • २२. अलगद्दूपम सुत

    २२. अलगद्दूपम सुत

    सुत्तपिटक / मज्झिमनिकाय

    एक भिक्षु अपनी पापी धारणा बनाता है। तब भगवान प्रसिद्ध उपमाओं के साथ अत्यंत गहरा धम्म बताया हैं।

  • २२. अलगद्दूपम सुत

    २२. अलगद्दूपम सुत

    सुत्तपिटक / मज्झिमनिकाय

    एक भिक्षु अपनी पापी धारणा बनाता है। तब भगवान प्रसिद्ध उपमाओं के साथ अत्यंत गहरा धम्म बताया हैं।

  • २४. पाथिक सुत्त

    २४. पाथिक सुत्त

    सुत्तपिटक / दीघनिकाय

    सुनक्खत भिक्षु को तमाशेबाज निर्वस्त्र तपस्वियों से आकर्षण है। किन्तु, तप का ऐसा तमाशा न भगवान करते हैं, न ही उनका भिक्षुसंघ। उसके भिक्षुत्व छोड़ने की बात पर, भगवान उसकी अक्ल ठिकाने लगाने की नाकाम कोशिश करते हैं।

  • २५. निवाप सुत्त

    २५. निवाप सुत्त

    सुत्तपिटक / मज्झिमनिकाय

    मार के चारे से कौन-से साधक बच सकते हैं? हिरणों की उपमा से भगवान समझाते हैं।

  • ३८. महातण्हासङ्खय सुत्त

    ३८. महातण्हासङ्खय सुत्त

    सुत्तपिटक / मज्झिमनिकाय

    एक भिक्षु अपने दृष्टिकोण पर अड़ा हुआ है। तब भगवान, संवादात्मक शैली में, प्रतीत्य समुत्पाद के सिद्धांत पर प्रतिप्रश्न करते हुए भिक्षुओं को गहरा अर्थ बताते हैं।

  • ४९. ब्रह्मनिमन्तनिक सुत्त

    ४९. ब्रह्मनिमन्तनिक सुत्त

    सुत्तपिटक / मज्झिमनिकाय

    एक हैरतअंगेज सूत्र, जिसमें भगवान जाकर ब्रह्मा की दृष्टि सुधारने का प्रयास करते हैं।

  • ५६. उपालि सुत्त

    ५६. उपालि सुत्त

    सुत्तपिटक / मज्झिमनिकाय

    एक निगण्ठ उपासक वादविवाद के लिए भगवान के पास जाता है, और भगवान के जादू से दीवाना होकर लौटता है।

  • ६३. चूळमालुक्य सुत्त

    ६३. चूळमालुक्य सुत्त

    सुत्तपिटक / मज्झिमनिकाय

    एक भिक्षु जाकर भगवान को धमकी देता है—दार्शनिक उत्तर न मिले तो संन्यास छोड़ देगा।

  • ७२. अग्गिवच्छ सुत्त

    ७२. अग्गिवच्छ सुत्त

    सुत्तपिटक / मज्झिमनिकाय

    वह संन्यासी अब भगवान से दुनिया की दस प्रमुख दार्शनिक मान्यताओं के बारे में प्रश्न करता है।

  • ७४. दीघनख सुत्त

    ७४. दीघनख सुत्त

    सुत्तपिटक / मज्झिमनिकाय

    इस प्रसिद्ध सूत्र में सारिपुत्त भन्ते को अरहंत फल प्राप्त हुआ, जबकि उनके परिव्राजक भांजे में धम्मचक्षु उत्पन्न हुआ।

  • १०१. देवदह सुत्त

    १०१. देवदह सुत्त

    सुत्तपिटक / मज्झिमनिकाय

    इस सूत्र में भगवान बुद्ध उन निगण्ठ (जैन) सिद्धांतों का खण्डन करते हैं, जिन्हें दुर्भाग्य से आज कई लोग बौद्ध मत समझ बैठे हैं।