✦ ॥ नमो तस्स भगवतो अरहतो सम्मासम्बुद्धस्स ॥ ✦
विषय दर्शन

देवता

— इस विषय से संबंधित संपूर्ण संकलन —

  • सिद्धार्थ गोतम का जन्म

    सिद्धार्थ गोतम का जन्म

    लेख

    कपिलवस्तु के राजा शुद्धोधन और रानी महामाया के घर जिस बालक का जन्म हुआ, वह कोई साधारण संयोग नहीं था। प्रारंभिक सूत्र इस जन्म को एक सामान्य मानवीय घटना के रूप में नहीं, बल्कि एक 'अच्छरियब्भुत' (आश्चर्यजनक अद्भुत घटना) के रूप में याद करते हैं।

  • ११. केवट्टसुत्तं

    ११. केवट्टसुत्तं

    सुत्तपिटक / दीघनिकाय

    क्या भिक्षुओं के द्वारा चमत्कार दिखाना उचित है, ताकि लोगों में श्रद्धा बढ़ जाएँ? भगवान का इस पर अविस्मरणीय उत्तर।

  • १२. महासीहनाद सुत्त

    १२. महासीहनाद सुत्त

    सुत्तपिटक / मज्झिमनिकाय

    एक पूर्व शिष्य के द्वारा निंदा होने पर, भगवान ऐसा उत्तर देते हैं कि सुनने वाले के रोंगटे खड़े हो जाए।

  • १४. महापदान सुत्त

    १४. महापदान सुत्त

    सुत्तपिटक / दीघनिकाय

    दुर्लभ ही होता है कि जब भगवान भिक्षुसंघ को बैठकर कोई कथा सुनाए। यह कथा पिछले सात सम्यक-सम्बुद्धों की महाकथा हैं। किन्तु, प्रश्न उठता है कि भगवान को यह महाकथा भला कैसे पता है?

  • १६. महापरिनिब्बान सुत्त

    १६. महापरिनिब्बान सुत्त

    सुत्तपिटक / दीघनिकाय

    यह पालि साहित्य का सबसे लंबा सूत्र है, जो बुद्ध की परिनिर्वाण कथा को विवरण के साथ बताता है। भगवान बुद्ध के अंतिम दिनों के बारे में यहाँ लंबा ब्योरा मिलता है, जिससे बुद्ध के व्यक्तित्व की गहराई झलकती है।

  • १९. महागोविन्द सुत्त

    १९. महागोविन्द सुत्त

    सुत्तपिटक / दीघनिकाय

    भगवान बुद्ध की एक और प्रेरणादायी जातक कथा, जिसमें उन्होंने अपनी कार्यक्षमता से भूतकाल के भारत को आकार दिया। और, फिर धर्म की ओर मुड़कर सनातन ब्रह्म-धर्म ढूँढ निकाला, और उसे पैगंबर या ईश्वर के दूत की तरह संपूर्ण जम्बूद्वीप में फैलाया।

  • २०. महासमय सुत्त

    २०. महासमय सुत्त

    सुत्तपिटक / दीघनिकाय

    भगवान बुद्ध का दर्शन लेने के लिए दूसरी दुनियाओं के अनेक देवतागण एकत्र हुए। तब, भगवान ने उनका वर्णन कर, भिक्षुओं का उनसे परिचय कराया।

  • ९०. कण्णकत्थल सुत्त

    ९०. कण्णकत्थल सुत्त

    सुत्तपिटक / मज्झिमनिकाय

    राजा प्रसेनजित, भगवान की ‘सर्वज्ञ-सर्वदर्शी’ बात की अफवाह सुनकर, सत्य जानने के लिए स्वयं भगवान के पास पहुँचता है।

  • १००. सङ्गारव सुत्त

    १००. सङ्गारव सुत्त

    सुत्तपिटक / मज्झिमनिकाय

    एक ब्राह्मण स्त्री के भगवान को याद करते ही चिढ़ा युवा ब्राह्मण, भगवान से मिलकर स्वयं उपासक बन जाता है।

  • १२०. सङ्खारुपपत्ति सुत्त

    १२०. सङ्खारुपपत्ति सुत्त

    सुत्तपिटक / मज्झिमनिकाय

    भगवान यहाँ भिक्षुओं को पुनर्जन्म चुनने की आजादी देते प्रतीत होते हैं—‘जिसे जहाँ जाना हो, यह उसका रास्ता है! जाओ!’

  • १३३. महाकच्चानभद्देकरत्त सुत्त

    १३३. महाकच्चानभद्देकरत्त सुत्त

    सुत्तपिटक / मज्झिमनिकाय

    महाकच्चान भन्ते अपने अनूठे अंदाज में ‘भद्देकरत्त’ कविता के गहरे अर्थों को भिक्षुओं के सामने खोलते हैं।

  • १३४. लोमसकङ्गियभद्देकरत्त सुत्त

    १३४. लोमसकङ्गियभद्देकरत्त सुत्त

    सुत्तपिटक / मज्झिमनिकाय

    एक देवता के आग्रह पर, एक भिक्षु भगवान के पास जाते हैं और भगवान उन्हें वही ‘भद्देकरत्त’ गाथा और उसका अर्थ समझाते हैं।