धातु
— इस विषय से संबंधित संपूर्ण संकलन —

धातु मनसिकार - धातु चिंतन!
लेखजब इतनी विशाल बाहरी पृथ्वीधातु की भी अनित्यता दिख पड़ती है, विनाश-स्वभाव दिख पड़ता है, पतन-स्वभाव दिख पड़ता है, बदलाव-स्वभाव दिख पड़ता है, तो इस अल्पकालिक काया का कहना ही क्या?

११. ब्रह्मविहारादि
ग्रन्थ / पटिपदाध्येयकुशल सन्तपद-अभिलाषी को यह करना चाहिए—सक्षम, सीधा और स्पष्टवादी हो...

१४. समाधिकुसल
ग्रन्थ / पटिपदाभिक्षुओं, जिस भिक्षु में छह गुण होते है, वह पर्वतराज हिमालय को चकनाचूर कर सकता है। अविद्या का कहना ही क्या! कौन-से छह?

१५. संवेग ओवाद
ग्रन्थ / पटिपदाभिक्षुओं, दस धर्म होते है, जिनके प्रति प्रवज्यितों को हमेशा चिंतनशील रहना चाहिए। कौन से दस?

११. केवट्टसुत्तं
सुत्तपिटक / दीघनिकायक्या भिक्षुओं के द्वारा चमत्कार दिखाना उचित है, ताकि लोगों में श्रद्धा बढ़ जाएँ? भगवान का इस पर अविस्मरणीय उत्तर।

२८. महाहत्थिपदोपम सुत्त
सुत्तपिटक / मज्झिमनिकायसारिपुत्त भन्ते धम्म के तमाम प्रमुख सिद्धान्तों को चार आर्य सत्यों में पिरो देते हैं।

६२. महाराहुलोवाद सुत्त
सुत्तपिटक / मज्झिमनिकायभगवान अपने युवा पुत्र राहुल को विविध प्रकार की साधना करने के लिए प्रेरित करते हैं।

११२. छब्बिसोधन सुत्त
सुत्तपिटक / मज्झिमनिकाययदि कोई भिक्षु अरहंत होने का दावा करें, तो न तो जश्न मनाएँ और न ही उसे नकार दें। बल्कि उससे ये पाँच प्रश्न पूछें।

११५. बहुधातुक सुत्त
सुत्तपिटक / मज्झिमनिकायइस दुनिया को ख़तरा मूर्ख से है, ज्ञानी से नहीं—और विवेकशील ज्ञानी वही है जो धातुओं, आयामों, प्रतित्य-समुत्पाद और संभव–असंभव में कुशल हो।

१४०. धातुविभङ्ग सुत्त
सुत्तपिटक / मज्झिमनिकायएक कुम्हार की कुटिया में भगवान एक ऐसे संन्यासी को छह धातुओं का उपदेश देते हैं, जिसे पता ही नहीं कि वह साक्षात बुद्ध से बात कर रहा है!

छह धातुएँ - साधना सिरीज़
देसनाअंग्रेज़ी में शरीर के अंदर के अनुभवों को व्यक्त करने के लिए बहुत सीमित शब्दावली है। हम कहते हैं 'झुनझुनी हो रही है' या 'भारीपन महसूस हो रहा है।' कभी कहते हैं जैसे शरीर पर चींटियाँ चल रही हों या पेट में तितलियाँ उड़ रही हों। बहुत ज़्यादा शब्द नहीं हैं, और कोई व्यवस्थित तरीका भी नहीं है।