✦ ॥ नमो तस्स भगवतो अरहतो सम्मासम्बुद्धस्स ॥ ✦
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नीवरण

— इस विषय से संबंधित संपूर्ण संकलन —

  • अकुसलप्पहान - अकुशल का त्याग

    अकुसलप्पहान - अकुशल का त्याग

    लेख

    अकुशल का त्याग करो! अकुशल का त्याग किया जा सकता है। यदि अकुशल का त्याग नहीं किया जा सकता, तो मैं तुमसे यह न कहता—अकुशल का त्याग करो!

  • उद्धच्चकुकुच्च - बेचैनी-पश्चाताप और उसका त्याग

    उद्धच्चकुकुच्च - बेचैनी-पश्चाताप और उसका त्याग

    लेख

    बेचैनी और पश्चाताप चित्त में उठा एक ऐसा तूफान है, जो हमारी अतिरिक्त और असंतुलित ऊर्जा का परिणाम है। जैसे उच्च रक्तचाप शरीर को थका देता है, वैसे ही चंचलता और अतीत का पछतावा चित्त को रोगी बना देते हैं।

  • कामछन्द - कामेच्छा और उसका त्याग

    कामछन्द - कामेच्छा और उसका त्याग

    लेख

    जो व्यक्ति जितना कामुकता में डूबता है, उसकी संवेदनाएँ उतनी ही मरती जाती हैं। उसका चित्त सूक्ष्म से गिरकर इतना स्थूल हो जाता है कि एक समय बाद उसे साधारण जीवन नीरस और बेजान लगने लगता है। तब और मज़ा निचोड़ने के लिए वह घिनौने कर्मों और नशे की दलदल में उतर जाता है।

  • थिनमिद्ध - सुस्ती-तंद्रा और उसका त्याग

    थिनमिद्ध - सुस्ती-तंद्रा और उसका त्याग

    लेख

    सुस्ती कोई साधारण नींद नहीं है; यह यथार्थ से भागने का चित्त का एक रक्षातंत्र है। जब चित्त वर्तमान क्षण की चुनौतियों या नीरसता का सामना नहीं कर पाता, तो वह खुद को 'शट डाउन' करने लगता है। व्यक्ति को लगता है कि उसे शारीरिक विश्राम चाहिए, लेकिन असल में उसका चित्त सत्य से आँखें चुरा रहा होता है।

  • ब्यापाद - दुर्भावना और उसका त्याग

    ब्यापाद - दुर्भावना और उसका त्याग

    लेख

    दुर्भावना, दरअसल, आत्मरक्षा की एक अंधी प्रतिक्रिया है। जब हम किसी मामूली बात को भी अपने अस्तित्व के लिए खतरा मान बैठते हैं, तो यह तुच्छ-सी बात भीतर धधकती आग बन जाती है। जो ऊर्जा दूसरों को जलाने उठती है, वह सबसे पहले स्वयं को ही राख कर देती है।

  • विचिकिच्छा - उलझन और उसका त्याग

    विचिकिच्छा - उलझन और उसका त्याग

    लेख

    उलझन या शंका बाहरी जानकारी की कमी से नहीं, बल्कि भीतर की अस्पष्टता से जन्म लेती है। जब चित्त का अपना कोई ठोस आधार नहीं होता, तो वह मानसिक गुलामी, अंधविश्वास और अनिश्चितता के रेगिस्तान में भटकने लगता है।

  • ४. वीरियारम्भ

    ४. वीरियारम्भ

    ग्रन्थ / पटिपदा

    अकुशल त्याग दो, भिक्षुओं! अकुशल त्याग सकते है। यदि अकुशल न त्याग सकते, तो मैं तुम्हें न कहता...

  • ६. संवेग

    ६. संवेग

    ग्रन्थ / पटिपदा

    नफ़रत मिटाने के पाँच तरीक़े हैं, मित्रों, जिनका उपयोग कर भिक्षु उत्पन्न नफ़रत पूर्णतः मिटा देता है। कौन-से पाँच?

  • ४. भयभेरव सुत्त

    ४. भयभेरव सुत्त

    सुत्तपिटक / मज्झिमनिकाय

    बोधिसत्व ने जंगल में अकेले रहकर डर और आतंक का सामना करते हुए संबोधि कैसे पायी?

  • २०. वितक्‍कसण्ठान सुत्त

    २०. वितक्‍कसण्ठान सुत्त

    सुत्तपिटक / मज्झिमनिकाय

    अपने बुरे विचारों को अच्छाई की तरफ कैसे मोड़ें? यादगार उपमाओं के साथ पाँच तरीके सुनें।