विषय दर्शन
पुण्य
— इस विषय से संबंधित संपूर्ण संकलन —





३१. सिङ्गालसुत्त
सुत्तपिटक / दीघनिकायएक युवा पुरुष अपने मृत पिता के आदेशानुसार व्यर्थ कर्मकांड करता है। किन्तु, बुद्ध उसे उसका गहरा महत्व समझाते हुए गृहस्थों के व्रत और जिम्मेदारियों पर प्रकाश डालते है।

९९. सुभ सुत्त
सुत्तपिटक / मज्झिमनिकायएक विख्यात ब्राह्मण-पुत्र भगवान से मिलने आता है, और गाली-गलौच तक करने के बाद अंततः शरण ग्रहण करता है।