✦ ॥ नमो तस्स भगवतो अरहतो सम्मासम्बुद्धस्स ॥ ✦
विषय दर्शन

पुण्य

— इस विषय से संबंधित संपूर्ण संकलन —

  • आवाहन

    आवाहन

    लेख

    दुनिया ने अचानक एक बड़ा मोड़ लिया है और उत्क्रांति के नए चरण में प्रवेश किया है। अब तेजी से आ रहे बदलाव नाटकीय स्तर पर हैं—कल्पना से परे।

  • परिचय

    परिचय

    ग्रन्थ / पुण्य

    पुण्य! एक ऐसा शब्द, जिसे हम बचपन से सुनते चले आ रहे हैं। जिस पर दर्जनों पुस्तकें और सैकड़ों प्रवचन उपलब्ध हैं। शायद ही कोई पुण्य की संकल्पना से अनजान होगा। लेकिन कितने लोग वास्तव में जानते हैं कि इसका क्या अर्थ है? और क्यों इसे करना चाहिए?

  • पुण्य

    पुण्य

    ग्रन्थ / पुण्य

    “हे गोतम! क्या कारण एवं परिस्थिति से कुछ सत्व मरणोपरांत काया छूटने पर सद्गति होकर स्वर्ग उपजते हैं?”

  • पुण्य

    पुण्य

    ग्रन्थ

    पुण्य ‘धर्म की नींव’ है। पुण्य ‘सुख की इमारत’ है। पुण्य ‘मुक्ति की सीढ़ी’ है। इस पुस्तक में आप जानेंगे कि धर्म की उस नींव को वर्तमान जीवन में कैसे रखा जाता है। सुख की उस इमारत को भविष्य के लिए कैसे खड़ा किया जाता है। और त्रिकाल दुःखमुक्ति की उस सीढ़ी पर कैसे चढ़ा जाता है।

  • ३१. सिङ्गालसुत्त

    ३१. सिङ्गालसुत्त

    सुत्तपिटक / दीघनिकाय

    एक युवा पुरुष अपने मृत पिता के आदेशानुसार व्यर्थ कर्मकांड करता है। किन्तु, बुद्ध उसे उसका गहरा महत्व समझाते हुए गृहस्थों के व्रत और जिम्मेदारियों पर प्रकाश डालते है।

  • ९९. सुभ सुत्त

    ९९. सुभ सुत्त

    सुत्तपिटक / मज्झिमनिकाय

    एक विख्यात ब्राह्मण-पुत्र भगवान से मिलने आता है, और गाली-गलौच तक करने के बाद अंततः शरण ग्रहण करता है।