बोधिसत्व
— इस विषय से संबंधित संपूर्ण संकलन —

४. भयभेरव सुत्त
सुत्तपिटक / मज्झिमनिकायबोधिसत्व ने जंगल में अकेले रहकर डर और आतंक का सामना करते हुए संबोधि कैसे पायी?

१२. महासीहनाद सुत्त
सुत्तपिटक / मज्झिमनिकायएक पूर्व शिष्य के द्वारा निंदा होने पर, भगवान ऐसा उत्तर देते हैं कि सुनने वाले के रोंगटे खड़े हो जाए।

१४. चूळदुक्खक्खन्ध सुत्त
सुत्तपिटक / मज्झिमनिकायभगवान अपने चचेरे भाई महानाम को कामुकता के बारे में बताते हैं। साथ ही, जैन साधकों से हुए वार्तालाप का उल्लेख भी करते हैं।

१४. महापदान सुत्त
सुत्तपिटक / दीघनिकायदुर्लभ ही होता है कि जब भगवान भिक्षुसंघ को बैठकर कोई कथा सुनाए। यह कथा पिछले सात सम्यक-सम्बुद्धों की महाकथा हैं। किन्तु, प्रश्न उठता है कि भगवान को यह महाकथा भला कैसे पता है?

१९. द्वेधावितक्क सुत्त
सुत्तपिटक / मज्झिमनिकायअपने विचारों से कैसे निपटें? और उन्हें लाँघकर संबोधि कैसे पाएँ? प्रस्तुत हैं, बोधिसत्व का व्यावहारिक तरीका।

२६. पासरासि/अरियपरियेसना सुत्त
सुत्तपिटक / मज्झिमनिकायदुनिया के सभी लोग, दरअसल, दो तरह की खोज में जुटे हैं। भगवान विस्तार से स्वयं की खोज भी बताते हैं।

३६. महासच्चक सुत्त
सुत्तपिटक / मज्झिमनिकायप्रसिद्ध अहंकारी बहसबाज सच्चक, इस बार अकेले में भगवान से वाद-विवाद करता है।

८५. बोधिराजकुमार सुत्त
सुत्तपिटक / मज्झिमनिकायराजकुमार मानता है कि परमसुख कठिन तप से मिलता है, सुखद मार्ग से नहीं! इसी पर भगवान का उत्तर।

१००. सङ्गारव सुत्त
सुत्तपिटक / मज्झिमनिकायएक ब्राह्मण स्त्री के भगवान को याद करते ही चिढ़ा युवा ब्राह्मण, भगवान से मिलकर स्वयं उपासक बन जाता है।