विषय दर्शन
बोध्यङ्ग
— इस विषय से संबंधित संपूर्ण संकलन —

बोज्झङ्ग की भावना
लेखबोध्यङ्ग, अर्थात 'संबोधि' के सात आवश्यक अंग। ये वे सात परम गुण हैं, जो जब एक साथ पूर्ण रूप से विकसित हो जाते हैं, तो साधक के चित्त के सभी अज्ञान रुपी जालों को काटकर उसे सीधे अंतिम विमुक्ति के द्वार पर खड़ा कर देते हैं।