✦ ॥ नमो तस्स भगवतो अरहतो सम्मासम्बुद्धस्स ॥ ✦
विषय दर्शन

ब्रह्मविहार

— इस विषय से संबंधित संपूर्ण संकलन —

  • शुरुवात कैसे करें - छठा कदम - भावना

    शुरुवात कैसे करें - छठा कदम - भावना

    लेख

    भावना' का अर्थ है—अच्छे गुण बढ़ाना, जैसे मेत्ता (सद्भावना), करुणा, शांति, एकाग्रता और अंतर्ज्ञान, जो हमारे भीतर की पुरानी, अकुशल प्रवृत्तियों को कम करते-करते अंततः उन्हें समाप्त तक कर देते हैं।

  • भावना

    भावना

    ग्रन्थ / पुण्य

    जो पुण्यक्रिया के तमाम आधार आपोआप (स्वर्ग में) उत्पन्न कराते हैं, वे ‘मेत्ता चेतोविमुक्ति’ के सोलहवें हिस्से के बराबर भी नहीं हैं। मेत्ता तमाम पुण्यों से आगे बढ़कर अधिक चमकती है, उजाला करती है, चकाचौंध करती है।

  • मरण

    मरण

    ग्रन्थ / पुण्य

    भंते, मैने अब तक भगवान के समक्ष यह नहीं सुना, यह नहीं सीखा कि कोई प्रज्ञावान उपासक, किसी बीमार, गंभीर रोग से पीड़ित प्रज्ञावान उपासक को कैसे उपदेश करें?

  • ११. ब्रह्मविहारादि

    ११. ब्रह्मविहारादि

    ग्रन्थ / पटिपदा

    ध्येयकुशल सन्तपद-अभिलाषी को यह करना चाहिए—सक्षम, सीधा और स्पष्टवादी हो...

  • प्रत्येक श्वास के साथ

    प्रत्येक श्वास के साथ

    ग्रन्थ

    थानिस्सरो भिक्षु की यह प्रसिद्ध कृति ध्यान-साधना पर आधारित एक सरल, स्पष्ट और पूरी तरह व्यावहारिक मार्गदर्शिका है। यह पुस्तक दो भरोसेमंद स्रोतों से प्रेरित है—एक ओर बुद्ध का आनापान, और दूसरी ओर आचार्य 'अजान ली धम्मधरो' की ध्यान-पद्धति।

  • ७. वत्थ सुत्त

    ७. वत्थ सुत्त

    सुत्तपिटक / मज्झिमनिकाय

    मैले चित्त को धोना किसी मैले वस्त्र को धोने के समान ही है। बस जान लें कि 'मैल' क्या हैं।

  • १३. तेविज्जसुत्तं

    १३. तेविज्जसुत्तं

    सुत्तपिटक / दीघनिकाय

    कुछ सच्चे त्रिवेदी ब्राह्मण युवक ब्रह्मा के साथ समागम करने के मार्ग पर उलझन में हैं। किन्तु वे भाग्यशाली हैं, क्योंकि भगवान पास ही रहते हैं।

  • १६. महापरिनिब्बान सुत्त

    १६. महापरिनिब्बान सुत्त

    सुत्तपिटक / दीघनिकाय

    यह पालि साहित्य का सबसे लंबा सूत्र है, जो बुद्ध की परिनिर्वाण कथा को विवरण के साथ बताता है। भगवान बुद्ध के अंतिम दिनों के बारे में यहाँ लंबा ब्योरा मिलता है, जिससे बुद्ध के व्यक्तित्व की गहराई झलकती है।

  • १९. महागोविन्द सुत्त

    १९. महागोविन्द सुत्त

    सुत्तपिटक / दीघनिकाय

    भगवान बुद्ध की एक और प्रेरणादायी जातक कथा, जिसमें उन्होंने अपनी कार्यक्षमता से भूतकाल के भारत को आकार दिया। और, फिर धर्म की ओर मुड़कर सनातन ब्रह्म-धर्म ढूँढ निकाला, और उसे पैगंबर या ईश्वर के दूत की तरह संपूर्ण जम्बूद्वीप में फैलाया।

  • २५. उदुम्बरिक सुत्त

    २५. उदुम्बरिक सुत्त

    सुत्तपिटक / दीघनिकाय

    यह सूत्र विभिन्न धर्मों के बीच होने वाले संवाद का एक बेहतरीन उदाहरण है। बुद्ध का आशय किसी को ‘बौद्ध’ बनाना नहीं, बल्कि उन्हें दुःखों से मुक्त करना है।

  • ४०. चूळअस्सपुर सुत्त

    ४०. चूळअस्सपुर सुत्त

    सुत्तपिटक / मज्झिमनिकाय

    श्रमण्यता के अनेक अनुचित व्रत और मार्ग हैं। भगवान उनकी निरर्थकता का खुलासा कर उचित मार्ग दिखाते हैं।

  • ४३. महावेदल्ल सुत्त

    ४३. महावेदल्ल सुत्त

    सुत्तपिटक / मज्झिमनिकाय

    यहाँ दो भिक्षुओं के सवाल-जवाब से धम्म के गहरे पहलू एक खिलते हुए फूल की तरह खुलते हैं।

  • ५२. अट्ठकनागर सुत्त

    ५२. अट्ठकनागर सुत्त

    सुत्तपिटक / मज्झिमनिकाय

    एक गृहस्थ भगवान के परिनिर्वाण के पश्चात अमृतद्वार ढूँढ रहा था। आनन्द भन्ते ने उसे एक नहीं, ग्यारह अमृतद्वार दिखाते हैं।

  • ५५. जीवक सुत्त

    ५५. जीवक सुत्त

    सुत्तपिटक / मज्झिमनिकाय

    क्या बुद्ध अपने लिए मारे गए प्राणी का मांस खाते हैं? भगवान का स्पष्ट उत्तर!

  • ६२. महाराहुलोवाद सुत्त

    ६२. महाराहुलोवाद सुत्त

    सुत्तपिटक / मज्झिमनिकाय

    भगवान अपने युवा पुत्र राहुल को विविध प्रकार की साधना करने के लिए प्रेरित करते हैं।

  • ८३. मघदेव सुत्त

    ८३. मघदेव सुत्त

    सुत्तपिटक / मज्झिमनिकाय

    भगवान की जातक कथा, जिसमें वे ऐसी कल्याणकारी प्रथा स्थापित करते हैं, जो इसके अनुसरणकर्ताओं को ब्रह्मलोक में सद्गति प्रदान करती है।

  • ९९. सुभ सुत्त

    ९९. सुभ सुत्त

    सुत्तपिटक / मज्झिमनिकाय

    एक विख्यात ब्राह्मण-पुत्र भगवान से मिलने आता है, और गाली-गलौच तक करने के बाद अंततः शरण ग्रहण करता है।