ब्रह्मा
— इस विषय से संबंधित संपूर्ण संकलन —

१. ब्रह्मजालसुत्तं
सुत्तपिटक / दीघनिकायसुत्तपिटक का पहला सूत्र स्पष्ट करता है कि क्या धर्म ‘नहीं’ है। भगवान इसमें दुनिया के विविध धार्मिक-अधार्मिक ६२ मान्यताओं के मायाजाल को तोड़ते हैं।

११. केवट्टसुत्तं
सुत्तपिटक / दीघनिकायक्या भिक्षुओं के द्वारा चमत्कार दिखाना उचित है, ताकि लोगों में श्रद्धा बढ़ जाएँ? भगवान का इस पर अविस्मरणीय उत्तर।

१४. महापदान सुत्त
सुत्तपिटक / दीघनिकायदुर्लभ ही होता है कि जब भगवान भिक्षुसंघ को बैठकर कोई कथा सुनाए। यह कथा पिछले सात सम्यक-सम्बुद्धों की महाकथा हैं। किन्तु, प्रश्न उठता है कि भगवान को यह महाकथा भला कैसे पता है?

१६. महापरिनिब्बान सुत्त
सुत्तपिटक / दीघनिकाययह पालि साहित्य का सबसे लंबा सूत्र है, जो बुद्ध की परिनिर्वाण कथा को विवरण के साथ बताता है। भगवान बुद्ध के अंतिम दिनों के बारे में यहाँ लंबा ब्योरा मिलता है, जिससे बुद्ध के व्यक्तित्व की गहराई झलकती है।

१८. जनवसभ सुत्त
सुत्तपिटक / दीघनिकायभगवान बुद्ध के एक पूर्वजन्म की प्रेरणादायी और रोमांचकारी कथा, जिसमें वे एक महान चक्रवर्ती सम्राट बने। सुदर्शन महाराज की महानता उनकी सहजता में घुल-मिलकर इस जातक कथा को अत्यंत रोचक और कभी न भूलनेवाली बनाती है।

२०. महासमय सुत्त
सुत्तपिटक / दीघनिकायभगवान बुद्ध का दर्शन लेने के लिए दूसरी दुनियाओं के अनेक देवतागण एकत्र हुए। तब, भगवान ने उनका वर्णन कर, भिक्षुओं का उनसे परिचय कराया।

२६. पासरासि/अरियपरियेसना सुत्त
सुत्तपिटक / मज्झिमनिकायदुनिया के सभी लोग, दरअसल, दो तरह की खोज में जुटे हैं। भगवान विस्तार से स्वयं की खोज भी बताते हैं।

४९. ब्रह्मनिमन्तनिक सुत्त
सुत्तपिटक / मज्झिमनिकायएक हैरतअंगेज सूत्र, जिसमें भगवान जाकर ब्रह्मा की दृष्टि सुधारने का प्रयास करते हैं।

६७. चातुम सुत्त
सुत्तपिटक / मज्झिमनिकायविहार में शोर मचाने वाले भिक्षुओं को भगवान निष्कासित कर देते हैं, लेकिन उन्हें वापस स्वीकारने पर वे चार संभावित खतरों से सावधान करते हैं।

९०. कण्णकत्थल सुत्त
सुत्तपिटक / मज्झिमनिकायराजा प्रसेनजित, भगवान की ‘सर्वज्ञ-सर्वदर्शी’ बात की अफवाह सुनकर, सत्य जानने के लिए स्वयं भगवान के पास पहुँचता है।