✦ ॥ नमो तस्स भगवतो अरहतो सम्मासम्बुद्धस्स ॥ ✦
विषय दर्शन

मान

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  • १०५. सुनक्खत्त सुत्त

    १०५. सुनक्खत्त सुत्त

    सुत्तपिटक / मज्झिमनिकाय

    जो भिक्षु स्वयं को ऊँचा आँक कर, अरहंत मानकर, साधना छोड़ देता है, उस पर भगवान का धम्मोपदेश।