✦ ॥ नमो तस्स भगवतो अरहतो सम्मासम्बुद्धस्स ॥ ✦
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  • ३१. सिङ्गालसुत्त

    ३१. सिङ्गालसुत्त

    सुत्तपिटक / दीघनिकाय

    एक युवा पुरुष अपने मृत पिता के आदेशानुसार व्यर्थ कर्मकांड करता है। किन्तु, बुद्ध उसे उसका गहरा महत्व समझाते हुए गृहस्थों के व्रत और जिम्मेदारियों पर प्रकाश डालते है।