✦ ॥ नमो तस्स भगवतो अरहतो सम्मासम्बुद्धस्स ॥ ✦
विषय दर्शन

मिथ्यादृष्टि

— इस विषय से संबंधित संपूर्ण संकलन —

  • सम्बोधि इतिहास

    सम्बोधि इतिहास

    लेख

    बुद्ध के समय का जम्बूद्वीप (भारत) केवल ऋषियों की भूमि नहीं थी, बल्कि एक 'बौद्धिक युद्धक्षेत्र' था। गणित और खगोलशास्त्र की नई खोजों ने लोगों की नींद उड़ा दी थी।

  • कर्म और हम

    कर्म और हम

    लेख

    कर्म दुनिया का सबसे चर्चित, लेकिन सबसे अधिक गलत समझा गया विषय बन गया है। आईये, सदियों पुरानी धूल हटाते हैं और कर्म को ठीक वैसे समझते हैं, जैसा बुद्ध ने अपने असीम ज्ञान के आधार पर समझाया।

  • इदप्पच्चयता - कारण कार्य सिद्धान्त

    इदप्पच्चयता - कारण कार्य सिद्धान्त

    लेख

    यह ब्रह्मांड का 'ऑपरेटिंग सिस्टम' है। ये वह धम्म नियम है जिससे ब्रह्मांड के अणु-अणु से लेकर आकाशगंगाएँ और हमारे मन का हर एक विचार संचालित होता है। इसी में पूरी सृष्टि गुंथी हुई है।

  • प्रतीत्य समुत्पाद

    प्रतीत्य समुत्पाद

    लेख

    यह सिद्धांत स्पष्ट करता है कि हमारा अस्तित्व किसी सीधी रेखा में चलने वाली घटना नहीं है, और न ही यह किसी शाश्वत 'आत्मा' की यात्रा है। यह हेतु और फल का एक जटिल ताना-बाना है। हम एक बंद कमरे में नहीं हैं, बल्कि एक प्रक्रिया का हिस्सा हैं जो निरंतर अपने आप को 'पका' रही है और 'खा' रही है।

  • कम्म - भाग तीन - कर्म के विरोधाभास और मुक्ति

    कम्म - भाग तीन - कर्म के विरोधाभास और मुक्ति

    लेख

    अक्सर लोग कर्म को बहुत ही सरल मान लेते हैं। ऐसा मानने की भूल न करें कि 'जैसा बोओगे, वैसा पाओगे', या 'सभी पुण्यशाली हमेशा १००% गारंटी के साथ स्वर्ग ही जाते हैं, जबकि सभी पापी नर्क ही।' याद रखें कि कर्म कोई सीधी रेखा में काम नहीं करता।

  • कम्म - भाग दो - कर्म की गहरी समझ

    कम्म - भाग दो - कर्म की गहरी समझ

    लेख

    बुद्ध ने कर्म के वास्तविक और उलझे हुए पैटर्न को अपनी गहरी प्रज्ञा से देखा, समझा और हॅक कर के उसे रोक दिया। रुकने के साथ ही मुक्ति घटित हुई। और उस मुक्ति के बाद, उन्होंने उस जटिल सत्य को हमारे लिए सरल बनाकर समझाने का प्रयास किया।

  • कर्म - भाग एक - कर्म की प्राथमिक समझ

    कर्म - भाग एक - कर्म की प्राथमिक समझ

    लेख

    तमाम दार्शनिक शोर-शराबे के बीच, भगवान बुद्ध का आगमन एक सिंहनाद की तरह गूँजा। उन्होंने पुरानी लाचार मान्यताओं को सिरे से खारिज कर दिया और घोषणा की...

  • १. ब्रह्मजालसुत्तं

    १. ब्रह्मजालसुत्तं

    सुत्तपिटक / दीघनिकाय

    सुत्तपिटक का पहला सूत्र स्पष्ट करता है कि क्या धर्म ‘नहीं’ है। भगवान इसमें दुनिया के विविध धार्मिक-अधार्मिक ६२ मान्यताओं के मायाजाल को तोड़ते हैं।

  • १. मूलपरियाय सुत्त

    १. मूलपरियाय सुत्त

    सुत्तपिटक / मज्झिमनिकाय

    इस निकाय के पहले ही धमाकेदार सूत्र को सुनकर कोई खुश नहीं हुआ! “क्या ब्रह्मांड का कोई मूल या जड़ है?” भगवान का उत्तर!

  • २. सामञ्ञफलसुत्तं

    २. सामञ्ञफलसुत्तं

    सुत्तपिटक / दीघनिकाय

    इस सूत्र में भगवान उजागर करते हैं कि धर्म वास्तव में क्या है। पुर्णिमा की रोमहर्षक रात में राजा अजातशत्रु भगवान के पास पहुँचकर मन की शान्ति पाता है।

  • १२. महासीहनाद सुत्त

    १२. महासीहनाद सुत्त

    सुत्तपिटक / मज्झिमनिकाय

    एक पूर्व शिष्य के द्वारा निंदा होने पर, भगवान ऐसा उत्तर देते हैं कि सुनने वाले के रोंगटे खड़े हो जाए।

  • २३. पायासि सुत्त

    २३. पायासि सुत्त

    सुत्तपिटक / दीघनिकाय

    राजा पायासि जिद्दी, भौतिकवादी और नास्तिक था। उसने ‘मरणोपरांत परलोक-वरलोक नहीं होता’ यह साबित करने के लिए बहुत अजीब प्रयोग किए थे। अंततः वह आकर अरहंत भिक्षु कुमार कश्यप से एक मनोरंजन-पूर्ण और यादगार बहस करता है।

  • २५. उदुम्बरिक सुत्त

    २५. उदुम्बरिक सुत्त

    सुत्तपिटक / दीघनिकाय

    यह सूत्र विभिन्न धर्मों के बीच होने वाले संवाद का एक बेहतरीन उदाहरण है। बुद्ध का आशय किसी को ‘बौद्ध’ बनाना नहीं, बल्कि उन्हें दुःखों से मुक्त करना है।

  • २९. पासादिकसुत्त

    २९. पासादिकसुत्त

    सुत्तपिटक / दीघनिकाय

    महावीर जैन के निधन होने पर उनके संघ में ‘कत्लेआम’ मचा। उसे सुनकर, बुद्ध अपने संघ में स्थिरता और प्रौढ़ता का भाव व्यक्त करते है। और, भिक्षुओं को संगीति के लिए प्रेरित भी करते है।

  • १०२. पञ्चत्तय सुत्त

    १०२. पञ्चत्तय सुत्त

    सुत्तपिटक / मज्झिमनिकाय

    पाँच और तीन—यह सूत्र प्रसिद्ध ब्रह्मजालसुत्त के समान है, केवल मध्यम-लंबाई का है।